चंडीगढ़, जेएनएन।  कोटखाई कस्टोडियल डेथ केस में बुधवार को सीबीआइ की स्पेशल अदालत में सूरज की मौत के समय मौजूद शिमला की एसपी सौम्या और कोटखाई थाना पुलिस में उस समय बतौर मुंशी तैनात प्रवीण कुमार की गवाही हुई।

एसपी सौम्या ने इस दौरान आइजी जैदी के खिलाफ एक एप्लीकेशन दी। इस पर अदालत ने डीजीपी शिमला को एप्लीकेशन के साथ अपने ऑर्डर भी भेज दिया है, जिसमें कोर्ट ने जांच कर कानून के मुताबिक एक्शन लेने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी। बुधवार को अदालत में कस्टोडियल डेथ केस के आरोपितों एसएचओ राजिंद्र सिंह, एएसआइ दीप सिंह, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत को पेश किया गया। वहीं एसपी सौम्या और मुंशी प्रवीण की गवाही हुई।

इस दौरान एसपी सौम्या ने कोर्ट में एप्लीकेशन दायर करते हुए कहा कि आइजी जहूर हैदर जैदी ने उन्हें फोन कर इस केस में उनके पक्ष में गवाही देने के लिए कहा और धमकाया। बताया कि इसके लिए जैदी द्वारा दबाव बनाया गया और उन्हे मानसिक रूप से परेशान किया गया। कोर्ट ने एसपी सौम्या की इस याचिका पर डीजीपी शिमला को जांच कर एक्शन लेने के लिए बोल दिया है।

यह है मामला

चार जुलाई 2017 को कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा अचानक लापता हो जाती है। दो दिन बाद जंगल से छात्रा का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टि हुई थी। आइजी जहूर हैदर जैदी के नेतृत्व में बनी एसआइटी ने केस को सुलझाने का दावा करते हुए एक स्थानीय युवक और पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया था। इनमें नेपाली मूल का सूरज नामक युवक भी था। कोटखाई थाने में सूरज की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। सीबीआइ जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी।

मेरे खिलाफ जो भी एसपी ने बोला वह बेबुनियाद है। मैंने अपने पक्ष में गवाही देने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया है। मामला अभी विचारधीन है। उन्हें कोर्ट और कानून पर पूरा विश्वास है।

- जहूर हैदर जैदी,आइजी, हिमाचल प्रदेश

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