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पंजाब के 6 जिले ‘अल्ट्रा सेंसिटिव’ घोषित, सचिन पायलट ने केंद्र व मान सरकार को घेरा; नशे के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई कब?

Published: Fri, 18 Sep 2026 10:50 PM (IST)

केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के छह जिलों को 'अल्ट्रा सेंसिटिव' ड्रग जोन घोषित करने के बाद राज्य में नशे के ...और पढ़ें

सचिन पायलट बोले नशे के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई कब होगी? फाइल फोटो

सचिन पायलट बोले नशे के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई कब होगी? फाइल फोटो

HighLights

  1. केंद्र ने पंजाब के 6 जिलों को 'अल्ट्रा सेंसिटिव' ड्रग जोन बताया।

  2. सचिन पायलट ने केंद्र-राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

  3. नशे की समस्या पर मिलकर काम करने की अपील की गई।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के छह जिलों अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और लुधियाना को ‘अल्ट्रा सेंसिटिव’ ड्रग जोन में शामिल किए जाने के बाद पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने आम आदमी पार्टी सरकार के साथ भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए हैं।

केंद्र ने देशभर में 73 जिलों को अल्ट्रा सेंसिटिव और 274 को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया है। इंटरनेट मीडिया पायलट ने कहा कि छह जिलों का इस श्रेणी में आना पंजाब में नशे की गंभीर स्थिति को उजागर करता है। उनके मुताबिक 2022 में सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने पंजाब को तीन महीने में नशामुक्त करने का वादा किया था, लेकिन आज भी जमीनी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने की योजना

वहीं उन्होंने केंद्र पर देशभर में नशे की तस्करी और बड़े ड्रग कंसाइनमेंट के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। पायलट ने भाजपा की ओर से आज 18 सितंबर से शुरू की जा रही ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राओं’ को भी निशाने पर लिया। भाजपा की चार यात्राएं 18 से 21 सितंबर के बीच अलग-अलग स्थानों से शुरू होकर 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होनी हैं और सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने की योजना है।

कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि नशे की समस्या पर आरोप-प्रत्यारोप से समाधान नहीं निकलेगा। दोनों सरकारों को मिलकर नशे की सप्लाई चेन और पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना होगा। सवाल यह है कि अब तक कार्रवाई इस पूरे नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंच पाई।

पायलट ने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पंजाब की युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा सवाल है। नशे की गिरफ्त में फंस रहे युवाओं और टूटते परिवारों की कीमत पूरा पंजाब चुका रहा है।