मोहाली [रोहित कुमार]। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले की जांच की क्लोजर रिपोर्ट को लेकर सिख जत्थेबंदियों का गुस्सा फूट पड़ा है। जत्थेबंदियों का कहना है कि इस मामले में कई बार जांच हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। बार-बार जांच कर रिपोर्ट पेश कर जनता को धोखा दिया जा रहा है। सोमवार को सिख जत्थेबंदियों ने गुरुद्वारा अंब साहिब से विरोध प्रदर्शन शुरू किया। वह सीबीआइ दफ्तर जाकर ज्ञापन सौंपना चाह रहे थे, लेकिन चंडीगढ़ सीमा पर बुड़ैल जेल के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पानी की बौछारें व आंसू गैस के गोले छोड़ेे व लाठियां भांजी। 

पुलिस कार्रवाई के दौरान कई सिख नेताओं की पगड़ियां उतर गई। चार सिखों के जख्मी होने की भी सूचना है। पुलिस उन्हें चंडीगढ़ में दाखिल होने से रोकने में कामयाब रही। सिख संगठनों का कहना है कि कांग्रेस सरकार को राज्य में ढाई साल हो गए हैं, लेकिन वह आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेक रही है। 

बता दें, बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों की जांच कर रही सीबीआइ ने दो सप्ताह पूर्व हमले से जुड़े तीनों केसों की क्लोजर रिपोर्ट सीबीआइ की मोहाली कोर्ट में पेश की थी। साढ़े तीन साल पुराने बेअदबी मामले के मुख्य आरोपित डेरा प्रेमी मोहिंदरपाल बिट़टू की नाभा जेल में 22 जून को हत्या के बाद सीबीआइ ने पंजाब पुलिस की जांच रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए यह रिपोर्ट पेश की। केस की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होनी है, लेकिन सुनवाई से एक दिन पूर्व सिख जत्थेबंदियों के प्रदर्शन से राजनीति गरमा गई है। 

मोहाली अदालत में सीबीआइ बनाम मोहिंदरपाल बिट्टू मामला चल रहा था। सीबीआइ के एडिशनल एसपी एस चक्रवर्ती ने द्वारा पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रिपोर्ट दिल्ली से सीबीआइ के एसपी द्वारा भेजी गई है। सीबीआइ अदालत के स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस रिपोर्ट को रजिस्टर करते हुए मामले की सुनवाई 23 जुलाई तक स्थगित कर दी थी। सीबीआइ अदालत ने इसी दिन इस मामले के रिमांड पेपर भी अदालत में तलब किए हैं।

पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं की जांच करने का केस 2 नवंबर 2015 को राजनीतिक पार्टियों और सिख संगठनों के दबाव में सीबीआइ को दे दिया था। इसके अलावा सरकार ने डीआइजी रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम का भी गठन किया था।

आयोग बनाने पर जांच हुई थी धीमी

सीबीआइ ने इस केस की जांच करते हुए मोहिंदरपाल बिट़टू से पूछताछ भी शुरू की, लेकिन जब कैप्टन सरकार ने इस मामले में जस्टिस रंजीत सिंह आयोग का गठन कर दिया तो सीबीआइ की जांच ढीली पड़ गई। सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ ने लंबे समय से इस केस को ठंडे बस्ते में ही डाला हुआ था, लेकिन बीती 22 जून को जब मुख्य आरोपित मोहिंदरपाल की नाभा जेल में दो सिख युवाओं ने हत्या कर दी तो यह केस और ठंडा पड़ गया।

पंजाब की राजनीति गरमाई

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले की जांच कर रही सीबीआइ द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट को लेकर राजनीति पहले ही गरमाई हुई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस भी इसका विरोध कर रही है। पार्टी इसके पीछे पॉलिटिकल साजिश का अंदेशा जता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हरियाणा में चुनाव के चलते डेरा प्रेमियों को खुश करने के लिए ऐसा किया गया है।

उधर, शिरोमणि अकाली दल का कहना है कि जब सभी प्रमुख केसों की जांच सीबीआइ कर रही थी तो कांग्रेसी नेता और कुछ पुलिस अधिकारी किस बलबूते इंटरव्यू देते हुए पर उछल रहे थे। उन्होंने कहा, अगर उनके पास सुबूत थे तो उन्होंने सीबीआइ को क्यों नहीं सौंपे? आम आदमी पार्टी ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं में तीन जानें जा चुकी हैं लेकिन किसी भी जांच में अभी तक सच्चाई बाहर नहीं आई है। दोनों सरकारें इस पर अपनी राजनीति कर रही हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता अमन अरोड़ा का कहना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले अब तक तीन जानें जा चुकी हैं लेकिन अब तक सच्चाई सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि पहले दो सिख युवाओं की जान गई और उसके बाद मोहिंदरपाल बिट्टू की हत्या हो गई। इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब में चाहे अकाली भाजपा सरकार हो या फिर कांग्रेस सरकार, सभी आम लोगों की भावनाओं के साथ खेलकर वोट की राजनीति कर रहे हैं।

12 अक्टूबर 2015 को हुई थी बेअदबी

एक जून 2015 को बरगाड़ी के गांव बुर्ज जवाहर सिंह के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ चोरी हो गए थे। 24 सितंबर 2015 को इसी गुरुद्वारा साहिब के बाहर शरारती तत्वों ने अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर चिपका दिया था। 12 अक्टूबर 2015 को चोरी हुए पावन ग्रंथ के खंडित अंग बरगाड़ी में गुरुद्वारा साहिब के बाहर मिले थे। 

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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