करमजीत परवाना, चंडीगढ़

किसी भी खेल को आगे लाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसके लिए ग्रास रूट पर काम किया जाए। देश में काफी खेल खेले जाते हैं, जिनमें से रग्बी भी है। इंटरनेशनल वुमन भारतीय रग्बी टीम के कोच रेहमुद्दीन शेख ने यह विचार सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में चल रही ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी रग्बी टूर्नामेंट के दौरान साझा किए। रेहमुद्दीन शेख वर्ष 2011 में आयोजित नेशनल गेम्स में सिल्वर मेडल विजेता टीम का हिस्सा थे। उसके अलावा वर्ष 2017 में आयोजित फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल विजेता टीम के साथ थे। प्रोफेशनल कोच और ग्राउंड की है कमी

उन्होंने कहा कि रग्बी को आगे लाने के लिए सबसे पहले जरूरत है प्रोफेशनल कोच की। उसके बाद अलग से रग्बी के लिए ग्राउंड के प्रावधान की। हमारे देश में दोनों की बहुत बड़ी कमी है। एक स्पो‌र्ट्स का प्रोफेशनल कोच ही खिलाड़ी को उस खेल में निखार सकता है। देश में हर खेल के लिए अलग-अलग मैदान बने हुए हैं, लेकिन हमारे देश में रग्बी का एक भी मैदान नहीं है। ऐसे में हम किस प्रकार इंटरनेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन करने के बारे में सोच सकते हैं।

महाराष्ट्र कर रहा है रग्बी में तेजी से ग्रोथ

देश में महाराष्ट्र एकमात्र ऐसा राज्य है जो रग्बी में तेजी से ग्रोथ कर रहा है। इसका प्रमाण ग्राउंड लेवल से पता चलता है। अभी तक महाराष्ट्र के 28 जिलों में रग्बी खेल पहुंच चुका है। यह अपने आप में एक चौंकाने वाला आंकड़ा है। इन 28 जिलों के स्कूल और कॉलेज तथा यूनिवर्सिटी में रग्बी का बेस तैयार होना शुरू हो चुका है। यहां ग्रास रूट पर रग्बी शुरू हो रही है, जोकि खुशी की बात है। रग्बी की मदद के लिए आगे आए क्रिकेट के भगवान

उन्होंने आगे बताया कि क्रिकेट मैदान पर कई रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने भी रग्बी के लिए मदद आगे आए हैं। सचिन ने आर्थिक रूप से रग्बी को प्रमोट करने के लिए पहल की है। महाराष्ट्र देश का एकमात्र ऐसा राज्य बना है जहां पर पूरे देश का पहला रग्बी सेंटर बन रहा है। इस सेंटर को बनाने के लिए भी सचिन तेंदुलकर ने मदद की है। उसके अलावा सचिन स्वंय खिलाड़ियों से मिलते हैं, उनसे बात करते हैं जिससे खिलाड़ी बहुत ज्यादा मोटिवेट हो रहें हैं।

मैच में घायल हुए 11 खिलाड़ी, छह पहुंचे अस्पताल

सोमवार को पीयू में हुए मैच में दोनों टीमों के 11 खिलाड़ी घायल हुए। इनमें से छह खिलाड़ी ज्यादा जख्मी थे, जिन्हें इलाज के लिए जीएमएसएच-16 ले जाया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है।

Posted By: Jagran

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