चंडीगढ़, जेएनएन। डडूमाजरा के गारबेज प्लांट पर कब्जा कर उसे चलाने की प्लानिंग नगर निगम की पूरी तरह से फेल हो गई है। क्योंकि जिला अदालत ने वीरवार को जेपी कंपनी को राहत देते हुए एमसी की ओर से भेजे गए नोटिस पर स्टे लगा दिया है। नगर निगम ने पिछले सप्ताह जेपी कंपनी को एमओयू खारिज करने का नोटिस भेजते हुए प्लांट हैंडओवर करने के लिए कहा था। नोटिस की समय सीमा वीरवार को ही समाप्त हुई है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विजय सिंह की कोर्ट ने स्टे लगाने के साथ ही तीन माह के भीतर आर्बिट्रेटर करने के लिए कहा है जोकि इस सारे विवाद को सुनकर निर्णय लेगा।

तीन माह तक नहीं हो सकेगी कार्रवाई

ऐसे में अब नगर निगम तीन माह तक जेपी कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा। वहीं, नगर निगम जिला अदालत की ओर से सुनाए गए फैसले को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। आज थी कब्जा करने की रणनीति वीरवार को ही नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस की समय सीमा समाप्त हो रही थी।

कमिश्नर केके यादव ने सुबह मेयर राजबाला मलिक के साथ बैठक कर गारबेज प्लांट पर शुक्रवार को कब्जा करने की रणनीति बना ली थी, लेकिन कोर्ट की ओर से आए फैसले के बाद एमसी की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई।

एमओयू खारिज करने को नहीं कहा

वीरवार को जिला अदालत में जेपी कंपनी के वकील आरएस वालिया ने कहा कि दिल्ली एनजीटी ने नगर निगम को एमओयू खारिज करने के लिए नहीं कहा है। जेपी कंपनी समझौते के अनुसार पिछले 11 साल से प्लांट चला रही है। नगर निगम कंपनी की प्रॉपर्टी को लूटने का प्रयास कर रहा है। कंपनी की ओर से कहा गया कि जेपी कंपनी के साथ समझौता खारिज करने का नगर निगम की ओर से अवैध तरीका अपनाया गया है। कंपनी की ओर से यह भी कहा कि सूखा और गीला कचरा सेग्रीगेट करके प्लांट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एमसी की है लेकिन नगर निगम ऐस नहीं कर पा रहा है।

प्रतिदिन 450 टन कचरा शहर का निकलता है लेकिन जेपी कंपनी 20 प्रतिशत मुश्किल से कचरा प्रोसेस कर पा रही है जिस कारण डंपिंग ग्राउंड में कचरा बढ़ रहा है। एमओयू के अनुसार जेपी कंपनी को शहर से निकलने वाला सारा कचरा प्रोसेस करना है।

कंपनी के कारण फैल सकती है महामारी, पहले से फैल रहा है कोरोना

नगर निगम ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली एनजीटी ने ही पिछले माह एमसी को कहा कि वह एक माह के भीतर फैसला ले कि उन्हें जेपी कंपनी के साथ काम करना है या नहीं। जिसके तहत ही सदन ने जेपी कंपनी के साथ एमओयू खारिज करने का फैसला लिया है। ऐसे में जेपी कंपनी की जिला अदालत में दायर अर्जी ही नहीं बनती है क्योंकि एनजीटी पहले ही फैसला सुना चुकी है। नगर निगम ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि डंपिंग ग्राउंड में कचरा लगातार गिरने से महामारी भी फैल सकती है जबकि पहले से कोरोना वायरस फैला हुआ है। 

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