मोहाली, जेएनएन। थाना बनूड़ में इरादा-ए-कत्ल व आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में पुलिस की ढीली जांच व सुबूतों की कमी के कारण एडिशनल जिला सेशन जज मोनिका गोयल की अदालत ने संपत नेहरा गैंग से संबंध रखने वाले सात आरोपितों दीपक कुमार उर्फ दीपू निवासी बनूड़, संदीप कुमार उर्फ नाटा निवासी नडियाली, दिनेश कुमार निवासी बनूड़, हरजिंदर सिंह उर्फ लाडी निवासी गांव छत, अमनदीप सिंह उर्फ मनी उर्फ रिस्की निवासी बादल कॉलोनी जीरकपुर, गुरविंदर सिंह उर्फ गोल्डी निवासी बनूड़, हरतेजवंत उर्फ तेजवंत सिंह उर्फ मक्खी निवासी बनूड़ को बरी कर दिया है। बेशक उक्त आरोपितों के खिलाफ और भी कई मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस की ढीली जांच के चलते उक्त आरोपितों से जो कारतूस बरामद किए दिखाए गए थे, जो कारतूस अदालत में पेश किए गए कारतूस के साथ मेल ही नहीं खा रहे थे।

इस बारे बचाव पक्ष के वकील जतिन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस ने न तो शिकायतकर्ता का मेडिकल अदालत में पेश किया और न ही किसी को मौके का गवाह बनाया गया था। उन्होंने बताया कि अदालत में पेश की गई डीवीडी वाली फोटो और असल फोटो भी आपस में मेल नहीं खा रही थी। इस मामले में पुलिस ने दीप, मनी और लाडी को जब नामजद किया तो वह पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में बंद थे और उन्हें जेल से लाकर उनकी गिरफ्तारी डाली गई थी। एडवोकेट जतिन अरोड़ा के अनुसार पुलिस ने सिर्फ मनी और लाडी से हथियार की बरामदगी दिखाई गई थी, जोकि अदालत में साबित ही नहीं हो सकी।

अक्षय से घर जाकर मारपीट की और किए थे फायर

उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा बनाई कहानी अनुसार रोहित जोशी को बचाने के लिए सामने आने पर उक्त आरोपितों ने अक्षय कुमार की उसके घर जाकर मारपीट की और उसके घर में गोलियां चलाई जोकि शीशे तोड़ती हुई दीवारों में लगी थी। पुलिस ने छह अप्रैल 2017 को उक्त सात आरोपितों के खिलाफ धारा 452, 307 , 323, 506, 148 ,149 व आम्र्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

 

 

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Posted By: Vikas Kumar

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