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सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर अजय सहगल को झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार 

Published: Wed, 19 Aug 2026 10:49 PM (IST)

मोहाली की स्थानीय अदालत ने सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर अजय सहगल की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।

सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर अजय सहगल को झटका। सांकेतिक फोटो

सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर अजय सहगल को झटका। सांकेतिक फोटो

HighLights

  1. मोहाली कोर्ट ने बिल्डर अजय सहगल की जमानत याचिका खारिज की।

  2. सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपों की गंभीरता के कारण।

  3. पीएमएलए धारा 45 की शर्तों को पूरा करने में विफल रहे।

जागरण संवाददाता, मोहाली। न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) के चर्चित सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्डिंग मामले में मोहाली की स्थानीय अदालत ने द इंडियन को-आपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव व बिल्डर अजय सहगल की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि आरोपित मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित दोहरी शर्तें पूरी करने में विफल रहा है। मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अजय सहगल की जमानत याचिका खारिज कर दी।

ईडी ने जमानत का किया विरोध

ईडी की ओर से विशेष सरकारी वकील जेएस सराओ ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपराध की कमाई पैदा करने, उसे अपने कब्जे में रखने तथा धन की अवैध रूटिंग और सिफनिंग करने के गंभीर आरोप हैं। ईडी के मुताबिक, ये लेनदेन अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे ठिकाने लगाने के उद्देश्य से किए गए।

बचाव पक्ष ने दी यह दलील

अजय सहगल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस सुखीजा, अधिवक्ता सुमेश जैन, एस. सिंह और करणवीर सिंह लाल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जांच एजेंसी अभी तक किसी खास रकम या लेनदेन की पहचान नहीं कर पाई है, जिसे सीधे तौर पर मनी लांड्रिंग से जोड़ा जा सके।

बचाव पक्ष ने कहा कि करीब 30 एकड़ जमीन में प्लाटों की बिक्री से प्राप्त रकम को अन्य स्रोतों की ओर मोड़ने का केवल सामान्य और बिना आधार का आरोप लगाया गया है। वकीलों ने यह भी कहा कि मूल एफआईआर 19 नवंबर 2022 को थाना मुल्लांपुर में दर्ज हुई थी, लेकिन करीब चार साल बीतने के बावजूद पुलिस ने अभी तक चालान पेश नहीं किया है। ऐसे में आरोपित जमानत का हकदार है।

फर्जी दस्तावेजों से मंजूरी लेने का आरोप

मुल्लांपुर पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने सितंबर 2024 में मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान सामने आया कि सोसायटी की ओर से 15 जमीन मालिकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाकर चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) और रेरा की मंजूरियां हासिल की गई थीं। ईडी ने इस मामले में अजय सहगल को 22 मई 2026 को गिरफ्तार किया था।