चंडीगढ़, जेएनएन। जीएमसीएच से कुछ दिन पहले सेक्टर-48 के नए हॉस्पिटल में शिफ्ट किए गए 45 वर्षीय एक कैंसर मरीज की रविवार दोपहर मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि मरीज की स्थिति बिगड़ने पर उसे ईसीजी के लिए जीएमसीएच भेजना पड़ा क्योंकि सेक्टर-48 हॉस्पिटल में अब तक ईसीजी टेक्नीशियन की तैनाती नहीं की गई है। 48 से जीएमसीएच जाने के दौरान मरीज की रास्ते में ही मौत हो चुकी थी, जिसकी पुष्टि जीएमसीएच के गेट पर एंबुलेंस में ही उसकी ईसीजी करके की गई।

इस मामले पर जीएमसीएच प्रशासन मौन है, क्योंकि उनके पास सेक्टर-48 अस्पताल में इमरजेंसी केयर के नाम पर की गई व्यवस्था में हुई इस चूक का कोई जवाब नहीं है। टेस्ट के लिए पांच किमी का सफर यहां भर्ती मरीजों को एक टेस्ट के लिए दिन भर में दो से तीन बार डीएमसीएच के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। ऐसे में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ रही है। इतना ही नहीं उनके लिए 48 के हॉस्पिटल में इमरजेंसी केयर की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में जरा सी भी स्थिति बिगड़ने पर आनन-फानन में जीएमसीएच भेजना पड़ रहा है।

75 से ज्यादा मरीजों की हर दिन हो रही फजीहत

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से लगभग 75 मरीजों को सेक्टर-48 के नए हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। उद्घाटन के सात महीने बाद वहां इलाज की सुविधा तो शुरू कर दी गई है लेकिन वहां शिफ्ट किए गए मरीजों को न तो वहां दवा मिल रही है न ही उनके परिजनों को खाना। उन्हें जांच के लिए दिनभर में दो से तीन बार जीएमसीएच के चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

एंबुलेंस से आ रहा खाना-पानी

वहां भर्ती मरीजों के लिए अभी न तो किचन की व्यवस्था है न ही भोजन की। ऐसे में जीएमसीएच से एंबुलेंस के जरिए सेक्टर-48 अस्पताल में खाना, चाय, पानी पहुंचाया जा रहा है। हॉस्पिटल के बाहर मार्केट न होने से मरीजों के तीमारदार बाहर से भी कुछ खाने के लिए नहीं ले जा पा रहे हैं।

 

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