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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चंडीगढ़ के पूर्व मेयर पर हमला; स्कूटर पर अकेले जा रहे थे राजेश कालिया, कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर आरोप

By Ankesh ThakurEdited By:
Published: Sat, 13 Nov 2021 11:57 AM (IST)

चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और मलोया के पार्षद के साथ कुछ लोगों ने हाथापाई कर दी। वह मलोया स्थित श्मशानघाट ...और पढ़ें

कालिया का आरोप है कि उनके साथ बदतमीजी करने वाले कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। फाइल फोटो
कालिया का आरोप है कि उनके साथ बदतमीजी करने वाले कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। फाइल फोटो

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। मलोया में शनिवार सुबह बवाल हो गया है। यहां पर पूर्व मेयर एवं वार्ड पार्षद राजेश कालिया के साथ किसान आंदोलन के समर्थन में गांव वालों ने बवाल किया। आरोप है कि लोगों ने कालिया के साथ हमला कर हाथापाई भी की है। पूर्व मेयर राजेश कालिया ने बताया कि वह मलोया में श्मशानघाट में बनने वाले नए टीन शेड के काम को शुरू करवाने के लिए जा रहे थे। उन्हें रास्ते में ही लोगों ने रोक लिया।

कालिया का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते और गांव वालों की अधिग्रहित जमीन का मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक वह कालिया को किसी नए काम का उद्घाटन नहीं करने देंगे। कालिया का कहना है कि वह अकेले स्कूटर पर जा रहे थे। तभी लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया और उनपर हमला करने की कोशिश कर गाली गलौच भी की गई है।

कालिया का आरोप है कि उनके साथ बदतमीजी भी की गई है और उनके लिए जाति सूचना शब्द का भी प्रयोग किया गया है। मालूम हो कि इस समय भाजपा नेताओं के साथ गांव में जाने पर बवाल हो रहा है। इससे पहले भी भाजपा नेताओं के खिलाफ गांव वाले नारेबाजी कर चुके हैं। पूर्व मेयर राजेश कालिया का कहना है कि उनके साथ हुई घटना की वह पुलिस में भी शिकायत करेंगे। कुछ लोग जानबूझकर गांव वालों को भड़का रहे हैं। इस समय कांग्रेस भी किसान आंदोलन को ज्यादा से ज्यादा भड़का रही है, ताकि नगर निगम चुनाव में उनकी पार्टी को फायदा मिल सके।इस समय नए सिरे से जो वार्डबंदी हुई है उनमे कॉलोनियों और सेक्टर के एरिया को गांव के साथ जोड़ा गया है ऐसे में भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्हें फायदा मिलेगा।इस समय कांग्रेस और अाप के लाेग किसान आंदोलन के कारण ग्रामीण सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।