जेएनएन, चंडीगढ़। एक तरफ राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस वसूलने की हिदायत दे रही है, दूसरी तरफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्कूलों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें 70 फीसद फीस वसूलने की मंजूरी दे दी है। हाई कोर्ट के इन आदेशों से अभिभावकों और पंजाब सरकार को बड़ा झटका है। कोरोना से बिगड़े आर्थिक हालात के कारण सरकार स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है।

गत दिवस सुबह शिक्षा मंत्री विजयइंदर सिंगला ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि प्राइवेट स्कूलों ने निर्देशों के बावजूद बच्चों से ज्यादा फीस ली तो वे मान्यता रद करवाने के लिए तैयार रहें। शाम को हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आदेश दिए कि प्राइवेट स्कूल अगले छह महीनों में दो किस्तों में सालाना एडमिशन फीस वसूल सकते हैं। जस्टिस रीतू बाहरी ने कहा कि निजी स्कूल अपने सभी शिक्षकों को 70 फीसद वेतन अदा करें।

इंडीपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन ने दायर की थी याचिका

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से 14 मई को जारी आदेशों के खिलाफ इंडीपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन चंडीगढ़ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि सरकार एक तरफ तो शिक्षकों को पूरा वेतन देने के लिए बाध्य कर रही है और दूसरी तरफ उन्हें विद्यार्थियों से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने को कह रही है।

क्या थे सरकार के आदेश

पंजाब के शिक्षा मंत्री ने प्राइवेट स्कूलों को फीस न बढ़ाने और लॉकडाउन की अवधि में सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश दिए थे। इन आदेशों में स्पष्ट था कि ऑनलाइन कक्षाएं लगाने वाले विद्यार्थियों से सिर्फ ट्यूशन फीस ली जाए और उनसे ट्रांसपोर्टेशन, बिल्डिंग या खाने आदि के चार्ज न वसूले जाएं। सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्ती से आदेश लागू करने कहा था।

याचिकाकर्ताओं की दलील

शिक्षकों का वेतन कम करने पर लगाई रोक

हाई कोर्ट में जस्टिस रीतू बाहरी की अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में प्राइवेट स्कूलों के वकील ने बताया कि सरकार ने स्कूलों को फीस घटाने के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन शिक्षकों का वेतन कम करने पर रोक लगा दी है। स्कूल अपने रिजर्व फंड, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के पास जमा करवाते हैं, जो लगभग 77 करोड़ पहुंच चुका है। सरकार स्कूलों को सैनिटाइज करने में कोई सहायता नहीं कर रही। एडमिशन फीस न लेने के आदेशों को गलत बताते हुए वकील ने कहा कि यह साल में सिर्फ एक बार ली जाती है।

सरकार ने मांगा और समय

पंजाब की डिप्टी एडवोकेट जनरल ने कहा कि निजी स्कूल विभिन्न मदों के तहत छात्रों से फीस वसूलते हैं। इस मामले में सरकार की तरफ से विस्तृत जवाब दायर करने के लिए समय मांगे जाने पर हाई कोर्ट ने सुनवाई 12 जून तक स्थगित कर दी।

सरकार के पास पहुंच रहीं शिकायतें

पूरी फीसद लेने से अभिभावक परेशान हैं। संबंधित अथॉरिटी के पास जालंधर में छह, पटियाला में दो, बरनाला में एक, बठिंडा व संगरूर में पांच-पांच और फिरोजपुर में तीन स्कूलों के खिलाफ शिकायतें पहुंची हैं। हालांकि, वे शिकायतें करने से डर रहे हैं। उन्हें यह भी डर सता रहा है कि उनकी शिकायत से बच्चों पर विपरीत असर भी पड़ सकता है। उधर, शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने दैनिक जागरण से कहा कि उनके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं कि प्राइवेट स्कूलों ने ट्यूशन फीस में ही अन्य खर्चों को मिला दिया है। मैंने सभी संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों से फोन पर कहा है कि वह स्कूल मैनेजमेंट से बात करें। अन्यथा सरकार को मान्यता रद करने जैसा कठोर कदम उठाना पड़ेगा।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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