चंडीगढ़ [इंद्रप्रीत सिंह]। केंद्र सरकार ने बेशक एससी पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप योजना फिर शुरू कर दी है, लेकिन 2017 से लेकर 2020 तक कालेजों में पढ़ाई कर चुके विद्यार्थियों की फीस का 1563 करोड़ रुपये का बकाया पंजाब सरकार की गले की फांस बनता जा रहा है। अब जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार चुनावी वर्ष में कदम रखने जा रही है तो ऐसे में यह वर्ग नाराज न हो जाए, इसलिए बीच का रास्ता निकालने के लिए मुख्यमंत्री ने चार सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी का गठन कर दिया है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार निजी कालेजों की प्रबंधक कमेटियों से बात करके उन्हें कम से कम पैसा लेने पर राजी करने की योजना बना रही है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल की अगुवाई में बनी कैबिनेट सब कमेटी की शुक्रवार को हुई पहली बैठक में इस पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार सब कमेटी ने 19 फरवरी को निजी कालेजों की प्रबंधक कमेटियों की बैठक बुलाई है। कालेजों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने सरकार पर दबाव बनाया हुआ है कि कालेजों की वित्तीय हालात पहले से ही खराब है, क्योंकि पूरी सीटें नहीं भर रही हैं, उस पर सरकार ने तीन वर्ष से स्कालरशिप राशि रोक रखी है।

यह प्रस्ताव रख सकती है सरकार

कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में विभाग की ओर से जो प्रस्ताव पेश किया गया उसमें कहा गया कि सरकारी कालेजों, पंजाब से बाहर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को यह फीस अदा करने की जरूरत नहीं है। इससे सरकार को 479 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। प्राइवेट और सरकारी सहायता प्राप्त कालेजों का तीन साल का बकाया 1085 करोड़ रुपये देने के लिए सरकार प्रस्ताव ला रही है कि निजी कालेज और सरकार यह खर्च आधा-आधा वहन करें। ऐसा करने पर राज्य सरकार पर 542.5 करोड़ रुपये का बोझ आएगा जो वह तीन वर्ष की किश्तों में अदा कर देगी। यह प्रस्ताव निजी कालेजों के समक्ष रखने के लिए कैबिनेट सब कमेटी ने 19 फरवरी को कालेजों की बैठक बुलाई है।

ऐसे बढ़ता गया बकाया

2017 से लेकर 2020 तक तीन वर्षों का क्रमश 451 करोड़, 349 करोड़ और 358 करोड़ रुपये सरकार की ओर बकाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 2012 से चलाई जा रही एससी स्कालरशिप योजना को वर्ष 2017 में खत्म कर दिया था। हालांंकि केंद्र सरकार अब इस योजना को दोबारा शुरू कर रही है, परंतु पंजाब सरकार ने केंद्र की ओर से बंद की गई योजना को 2017 के बाद भी जारी रखा।

कालेजों को आश्वासन दिया गया कि यह राशि उन्हें मिल जाएगी। अब तीन वर्ष बीत जाने पर भी कालेजों को यह राशि नहीं मिली। निजी कालेजों के साथ साथ सरकारी कालेजों के भी 218 करोड़ रुपये बकाया हैैं। इसके अलावा 12.18 करोड़ रुपये पंजाब से बाहर पढऩे वाले विद्यार्थियों के भी बकाया हैं। यानी कुल 1563 करोड़ रुपये बनते हैं।

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