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पंजाब की करणवीर का विदेश का सपना रह गया अधूरा, किडनियां दान कर दो लोगों की जिंदगी में भर गई उड़ान

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:18 PM (IST)

पंजाब के संगरूर जिले की 20 वर्षीय करणवीर का विदेश जाने का सपना अधूरा रह गया। सड़क हादसे के बाद ...और पढ़ें

20 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह चुकी करणवीर ने दान की बड़ी मिसाल पेश की। (एआई जनरेटेड इमेज)

20 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह चुकी करणवीर ने दान की बड़ी मिसाल पेश की। (एआई जनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. सड़क हादसे के बाद करणवीर को ब्रेन डेड घोषित किया गया।

  2. दोनों किडनियां पीजीआई में दो मरीजों में प्रत्यारोपित की।

  3. पीजीआई ने परिवार के साहसिक फैसले की सराहना की।

मोहित पांडेय, चंडीगढ़। कुछ इंसान अपने नाम के मुताबिक पहचान छोड़ जाते हैं और उन्हीं में एक रही पंजाब के संगरूर जिले के मुलोवाल गांव की बेटी करणवीर। महाभारत के योद्धा कर्ण को दानवीर कहा जाता है।

कर्ण की तरह 20 वर्ष की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह चुकी करणवीर ने भी दान की बड़ी मिसाल पेश की है। करणवीर की दोनों किडनियों से दो लोगों को नई जिंदगी मिली है। दोनों किडनियां पीजीआई में 38 और 32 वर्षीय दो पुरुष मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं।

करणवीर ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आइलेट्स पास कर ली थी। वह विदेश जाकर अपना भविष्य संवारने की तैयारी कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि बेटी अपने सपने पूरे करेगी और जिंदगी में आगे बढ़ेगी।

15 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे ने परिवार की दुनिया बदल दी। धूरी और लुधियाना के अस्पतालों में उपचार के बाद उसे 16 अक्टूबर को पीजीआई लाया गया। चिकित्सकीय जांच के बाद 21 अक्टूबर को उसे ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया।

दूसरों में जिंदा रहेगी उम्मीद

बेटी को हमेशा के लिए खो देने के बावजूद पिता जगदीप सिंह ने करणवीर के अंगदान की सहमति दी। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता की तरह उन्होंने भी करणवीर के लिए कई सपने देखे थे।

बेटी के बिना जिंदगी की कल्पना करना बेहद मुश्किल है, लेकिन अगर उसके अंग किसी दूसरे को जीवन जीने का मौका दे सकते हैं, तो इससे बड़ा सुकून क्या होगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी बेटी के अंगों से दो परिवारों को मुस्कुराने और भविष्य के सपने देखने का अवसर मिलेगा। भले ही करणवीर का विदेश जाने का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन किडनियां दान कर दो लोगों की जिंदगी में उड़ान भरकर गई हैं।

पीजीआई ने फैसले को सराहा

पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि गहरे दुख के बीच अंगदान का निर्णय लेना असाधारण साहस और मानवता का उदाहरण है। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण मरीजों को बेहतर जीवन जीने का अवसर दे सकता है।

रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने भी परिवार के प्रति आभार जताया। ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर डाॅ. नवदीप बंसल और रोटो नॉर्थ के नोडल अधिकारी डाॅ. विजय ताडिया ने भी अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।