चंडीगढ़, जेएनएन। सुखपाल सिंह खैहरा ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के मुद्दे को लेकर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर हमला किया है। उन्‍होंने कहा कि शिअद ने संसद में शिअद ने संसद में सीएए का समर्थन किया और अब पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल धर्मनिरपेक्षता की बात कर रहे हैं।

खैहरा ने कहा कि अल्पसंख्यकों से हो रही ज्यादतियों का मुद्दा उठाकर प्रकाश सिंह बादल ने अपनी साख बहाल करने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने दस सालों के कुशासन में सिख विरोधी कारनामों के कारण उनकी सिख पंथ में साख बुरी तरह से गिर गई है। वह भाजपा अकाली दल से नाता तोडऩे का दबाव बना रहे हैं।

खैहरा ने कहा कि बादल अचानक से अल्पसंख्यकों के मुद्दई कैसे हो गए, जबकि उनकी पार्टी ने हाल ही में जम्मू कश्मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाने के लिए हुई वोटिंग में इसका समर्थन किया है। यही नहीं उन्होंने जम्मू-कश्मीर को तोड़ने को भी सही ठहराया है, जबकि वह खुद फेडरल सिस्टम को मजबूत करने की आवाज उठाते रहे हैं।

खैहरा ने बादल से पूछा कि आरएसएस और भाजपा नेताओं की ओर से भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के दावों पर उन्होंने मौन क्यों धारण किया हुआ है? उन्होंने कहा कि तानाशाही तरीके से उमर अब्दुल्‍ला और महबूबा मुफ्ती पर पीएसए लगाकर उन्हें नजरबंद करने पर वह चुप क्यों हैं?

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सुखपाल खैहरा ने बादल को यह भी याद दिलाया कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की हुई घटनाओं और बहिबलकलां पुलिस फायरिंग में दो सिखों के मारे जाने के समय वह चुप क्यों थे, यह कारनामे सिख कौम भूली नहीं है। वह स्पष्ट करें कि सिख नौजवानों को झूठे पुलिस मुकाबलों में मारने वाले डीजीपी सुमेध सिंह सैणी को उन्होंने डीजीपी क्यों नियुक्त किया। पूर्व डीजीपी इजहार आलम की पत्नी को अपनी पार्टी से टिकट देकर विधायक क्यों बनाया, जबकि उन्होंने सिख नौजवानों में पुलिस कैट पैदा करने के लिए आलम सेना बनाई थी?

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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