चंडीगढ़, जेएनएन। चंडीगढ़ में लगाए गए वीकेंड लॉकडाउन के दौरान सड़काें पर आवाजाही इसलिए भी जारी है क्योंकि प्रशासन की ओर से लोगों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। असल में प्रशासन लोगों को अपने स्तर पर खुद ही जागरूकता की भावना पैदा करना चाहता है। इसलिए प्रशासन ने अब वैक्सीनेशन के लिए शहर की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों से भी मदद मांगी है।

सलाहकार मनोज परिदा ने रविवार को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कहा कि यह कर्फ्यू नहीं है। यह आपकी सुरक्षा और देखभाल है। ऐसे में शहरवासियों को सहयोग देना चाहिए। सलाहकार समय समय पर लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से अवेयर कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने कहा था कि चंडीगढ़ की स्थिति बहुत ही गंभीर है। मुख्य न्यायधीश व डीजीपी भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। बावजूद इसके अभी भी लोग कोरोना को हल्के में ले रहे हैं। लोगों को ये रवैया छोड़ देना चाहिए और लॉकडाउन के नियमों का पालन करना चाहिए।

इसके साथ ही अब शहरवासियों और व्यापारियों की नजर पूरी तरह से प्रशासन पर है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। सोमवार या मंगलवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर वार रूम की बैठक में वींकेंड लॉकडाउन की समीक्षा करेंगे। पंचकूला और मोहाली के अधिकारियों से भी बात की जाएगी। जबकि शहर के व्यापारी संगठन वीकेंड लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है। 

व्यापारियों ने प्रशासन से कोई दूसरा रास्ता निकालने की अपील की है। व्यापार मंडल और दूसरे संगठन इसी सप्ताह प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। इस समय होटल और रेस्टोरेंट का कारोबारी भी प्रशासन से नाराज हैं। क्योंकि लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू से सबसे ज्यादा उन्हें ही नुकसान हो रहा है। वीकेंड लॉकडाउन में होलट और रेस्टोरेंट से होम डिलिवरी की सुविधा दी गई है। लेकिन उनका कहना है कि इसका उन्हें फायदा नहीं मिल रहा है। इन्हें उम्मीद है कि प्रशासन इस फैसले को रिव्यू करेगा। प्रशासन की ओर से वीकेंड पर पर्यटक स्थल भी बंद कर दिए हैं, जिसका प्रभाव टूरिज्म डिपार्टमेंट पर पड़ रहा है।

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