जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद् के सहयोग से पीयू के हंिदूी विभाग द्वारा शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘साहित्य, अध्यात्म और समाज के विकास में श्री गुरु नानक देव की भूमिका’ विषय पर आधारित यह कार्यशाला आइसीएसएसआर सभागार में आयोजित की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।

ईश्वर के साकार रूप को तोड़ा जा सकता है किंतु निराकार रूप को तोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि वो कण-कण में व्याप्त होता है यह बात केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने बीज वक्ता की भूमिका निभाते हुए कही। कुलसचिव प्रो. करमजीत सिंह ने बताया कि गुरु नानक की वाणी हमारे जीवन में तनाव को दूर करने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रथम सत्र ‘अध्यात्म के बारे में गुरु नानक देव के विचार’ विषय पर आधारित रहा। दूसरे सत्र का विषय ‘साहित्य पर गुरु नानक देव का प्रभाव’ था। तृतीय सत्र ‘समाज में एक शिक्षक के रूप में गुरु नानक का योगदान’ विषय पर आधारित था। इस सत्र की वक्ता प्रो. नंदिता सिंह, डीन विदेशी छात्र, पंजाब विश्वविद्यालय और डॉ. भवनीत भट्टी, जनसंचार विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय थी।

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