राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों की जाच के लिए गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों को फरीदकोट के पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में चरणजीत सिंह ने कहा है कि आयोग ने अपनी जाच में न सिर्फ कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट 1952 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है, बल्कि अपनी सिफारिशों में इस मामले में उपलब्ध तथ्यों को भी नजरअंदाज किया है। गौरतलब है कि पंजाब में पूर्व अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं के विरोध में बहिबल कलां में सिख संगठनों ने प्रदर्शन किया था। इसमें पुलिस फायरिंग में 2 युवाओं की मौत हो गई थी।

पूर्व पंजाब सरकार ने इस मामले में जस्टिस जोरा सिंह की अध्यक्षता में जाच आयोग का गठन किया था, लेकिन राज्य में काग्रेस की सरकार बनने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसे खारिज कर जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन किया गया था। जस्टिस रणजीत सिंह ने अपनी जाच रिपोर्ट में बहिबलकला में हुए गोलीकाड के लिए पुलिस अधिकारियों को दोषी पाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस ने शातिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बेवजह गोली चलाई। पूर्व सरकार ने एक एसएसपी को निलंबित करके और पुलिस महानिदेशक को बदल कर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया। फिलहाल चरनजीत सिंह और एक अन्य पुलिस अधिकारी की ओ से दायर की गई याचिका पर वीरवार को जस्टिस राकेश कुमार जैन की अदालत में सुनवाई होने की संभावना है।

Posted By: Jagran