पंजाब CMO से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में CBI के सामने पेश हुए राजबीर घुम्मन, पहली बार जांच में हुए शामिल, ED भी कर रही जांच
पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मन कथित सीएमओ भ्रष्टाचार मामले में पहली बार सीबीआई के सामने पेश हुए। सुप्रीम ...और पढ़ें

CBI के सामने पेश हुए राजबीर घुम्मन। फोटो जागरण
HighLights
राजबीर घुम्मन कथित सीएमओ भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई के सामने पेश।
सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक के बाद हुए शामिल।
सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियां कर रही हैं मामले की जांच।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) के कार्यालय में पेश हुए। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह पहला मौका है, जब राजबीर घुम्मन जांच एजेंसी के सामने पहुंचे हैं।
उनके साथ वकील जीपीएस घुम्मन भी मौजूद थे। वकील ने बताया कि सीबीआइ की ओर से राजबीर घुम्मन को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें शुक्रवार को पेश होने का समय दिया गया था। इसी के तहत वह जांच में शामिल होने पहुंचे।
इससे पहले सीबीआई ने राजबीर घुम्मन को पूछताछ के लिए तीन बार समन जारी किए थे, लेकिन वह एक बार भी पेश नहीं हुए थे। इसके बाद 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अब राजबीर घुम्मन पहली बार जांच एजेंसी के सामने पेश हुए हैं।
ED भी कर रही जांच
इस मामले में सीबीआइ के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहा है। राजबीर घुम्मन के वकील जीपीएस घुम्मन ने बताया कि ईडी ने भी इस मामले में कार्रवाई की है। ईडी ने 13 अक्टूबर को जालंधर में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया था। अब मामले में दोनों केंद्रीय एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
सीबीआइ की जांच में सरकारी विभागों में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर और सरकारी फाइलों से संबंधित कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है, जबकि ईडी कथित वित्तीय लेन-देन और मनी लांड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
ईडी ने मामले में वाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, इन कथित चैट और डिजिटल सामग्री में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर तथा सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।
जांच एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर सरकारी कामकाज और मंजूरियों से जुड़े मामलों में कथित प्रभाव के इस्तेमाल की जांच कर रही है। हालांकि, ये आरोप और दावे जांच एजेंसियों की ओर से सामने रखे गए हैं और मामले की जांच अभी जारी है।
वित्तीय लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच
ईडी की जांच के दौरान नितिन गोहल समेत कुछ लोगों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी में दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई है। ईडी ने नितिन गोहल से 20.98 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी दावा किया है। एजेंसी इस मामले में कथित वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले का एक प्रमुख पहलू ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) की जमीन, भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू), संपत्ति के लेन-देन और रियल एस्टेट से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित है। ईडी इन मामलों में कथित मनी लांड्रिंग की जांच कर रही है।
एजेंसी ने सरकारी मंजूरियों और जमीन से संबंधित मामलों में कथित प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। सीएमओ से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर और सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच जैसे पहलुओं का भी उल्लेख है।
राजबीर घुम्मन और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
मामले की शुरुआत में ईडी ने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान पंजाब पुलिस के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को कार्रवाई के लिए तीन पत्र भेजे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस समय पंजाब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके बाद पांच अक्टूबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी। छह अक्टूबर को सीबीआइ ने राजबीर घुम्मन और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सीबीआइ ने छह और सात अक्टूबर को छापेमारी की। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय और राजबीर घुम्मन के मोहाली तथा संगरूर स्थित आवास सहित आठ ठिकानों पर तलाशी ली।
इसके बाद सात से नौ अक्टूबर के बीच सीबीआइ ने पूछताछ के लिए राजबीर घुम्मन को तीन बार समन जारी किए। इन समन के बावजूद वह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे। इसी दौरान पंजाब सरकार ने सीबीआइ जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अदालत ने जांच में पूरा सहयोग करने के दिए निर्देश
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन राजबीर घुम्मन की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए।
इसके अगले दिन, 13 अक्टूबर को ईडी ने भी मामले में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। इससे मामले की जांच का दायरा बढ़ गया और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के साथ वित्तीय लेन-देन की जांच भी शुरू हो गई।
सीबीआई ने 15 और 16 अक्टूबर को पंजाब सरकार के 15 विभागों से अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित मूल रिकॉर्ड मांगे। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी फैसलों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। दूसरी ओर, ईडी कथित मनी लांड्रिंग, जमीन से संबंधित मामलों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पहली बार जांच में हुए शामिल
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को राजबीर घुम्मन का सीबीआइ कार्यालय पहुंचना मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद तीन समन जारी किए जाने के बावजूद वह पहले जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे। सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई पर अंतरिम राहत मिलने के बाद अब वह जांच में शामिल हुए हैं।
फिलहाल सीबीआइ और ईडी दोनों की जांच जारी है। जांच एजेंसियां सरकारी रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
