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चंडीगढ़ में भवन दुरुपयोग नोटिसों की वैधता पर उठे सवाल, सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने शुरू किया फैक्ट-चेक अभियान

Published: Mon, 12 Jan 2026 05:17 PM (IST)

सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी भवन दुरुपयोग और पेनल्टी नोटिसों की वैधता पर सवाल उठाते हुए एक ...और पढ़ें

सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने जारी किया फैक्ट-चेक अभियान (

सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने जारी किया फैक्ट-चेक अभियान (

HighLights

  1. चंडीगढ़ प्रशासन के भवन दुरुपयोग नोटिसों पर फैक्ट-चेक शुरू।

  2. हजारों नोटिसों पर पेनल्टी से संपत्ति मालिकों पर भारी बोझ।

  3. एसोसिएशन ने नोटिसों की कानूनी वैधता पर उठाए सवाल।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन द्वारा भवन दुरुपयोग (मिसयूज) और पेनल्टी चार्जेज से संबंधित हजारों नोटिसों को लेकर एक फैक्ट-चेक पहल शुरू करने की घोषणा की है। एसोसिएशन का कहना है कि यूटी प्रशासन ने लगभग 5000 नोटिस जारी किए हैं, जिनमें रोजाना के आधार पर पेनल्टी जुड़ती जा रही है, जिससे संपत्ति मालिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

एसोसिएशन के अनुसार, भले ही इन मामलों में फिलहाल कार्रवाई, वसूली और संपत्ति की पुनःस्वीकृति (रिज़म्पशन) की प्रक्रिया स्थगित है, लेकिन पेनल्टी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि ये नोटिस वास्तव में किसी वैधानिक शक्ति के तहत जारी किए गए हैं या केवल अस्पष्ट सार्वजनिक नोटिसों और कथित आधारों पर।

सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने कुछ अहम बिंदुओं की ओर सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया है। एसोसिएशन ने कहा कि यूटी प्रशासन ने 23 जनवरी 2019 और अप्रैल 2022 में कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट, 1952 में संशोधन के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किए थे। यदि ये नोटिस उस समय वैध थे, तो अब गृह मंत्रालय (एमएचए) से नए सिरे से कानून संशोधन और अधिकारियों को भवन उल्लंघन शुल्क को तर्कसंगत बनाने का अधिकार देने की मांग क्यों की जा रही है।

एसोसिएशन ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल 2022 के नोटिस को व्यापक जनविरोध के कारण लागू नहीं किया जा सका और उस पर रोक लग गई थी। इसी तरह, कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट, 1952 को सोलर पैनल संरचनाओं से जोड़ने का प्रस्ताव भी अंततः वापस लेना पड़ा।

प्रेस नोट में कहा गया है कि यह पहल यूटी प्रशासन की कार्यप्रणाली और शासन शैली को जनता के सामने लाने के लिए है। वर्षों से नियमों को इस तरह लागू किया गया है कि आम नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया और प्रभावी सुनवाई के दंडात्मक नोटिस झेलने पड़े हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि चंडीगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारी अक्सर विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग ऐसे आदेश जारी करने में करते हैं, जिनका मजबूत कानूनी आधार नहीं होता, जिससे अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ती है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि अप्रैल 2022 के बाद यह स्थापित हो चुका है कि संसद में संशोधन के बिना यूटी प्रशासन को कैपिटल ऑफ पंजाब एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद लगभग चार वर्षों से यह विधायी प्रक्रिया लंबित है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि यदि भविष्य में कानून में संशोधन होता है, तो क्या उसमें पिछली तारीख से राहत देने का प्रावधान होगा या फिर यह केवल भविष्य के लिए लागू होगा, जिससे मौजूदा पीड़ितों की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।

सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. के. गर्ग ने कहा कि यह प्रेस नोट जनता को सच्चाई से अवगत कराने और पारदर्शी व न्यायसंगत प्रशासनिक प्रक्रिया की मांग को मजबूती देने के उद्देश्य से जारी किया गया है।