मोहाली में 22.20 लाख रुपये लेकर फ्लैट नहीं दिया, बिल्डर पर मनमानी पड़ी भारी; अब ब्याज समेत लौटाने होंगे पैसे
पंजाब रेरा ने जीरकपुर के रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट के बिल्डर को फ्लैट न देने पर शिकायतकर्ता को 22.20 लाख रुपये ब्याज सहित 90 दिन में लौटाने का आदेश दिया है।

रेरा ने बिल्डर को मूल रकम और उस पर अर्जित ब्याज का भुगतान करने का दिया आदेश।
HighLights
जीरकपुर के रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट का मामला।
90 दिन के भीतर ब्याज सहित भुगतान करना होगा।
पंजाब रेरा ने सुनाया शिकायतकर्ता के हक में फैसला।
मेजर अली, जीरकपुर (मोहाली)। जीरकपुर के किशनपुरा स्थित रॉयल एम्पायर (रायल मिनार) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के बाद भी कब्जा नहीं मिलने के मामले में पंजाब रेरा ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
प्राधिकरण ने बिल्डर को 22.20 लाख रुपये वापस करने के साथ रकम पर पंजाब रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) रूल्स-2017 के नियम 16 के तहत निर्धारित ब्याज देने के आदेश दिए हैं। यह भुगतान आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर करना होगा।
शिकायतकर्ता ने रेरा में दायर शिकायत में बताया था कि उसने 10 जून 2011 को रॉयल एम्पायर प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट की कुल कीमत 35 लाख रुपये तय हुई थी। इसके बाद उसने अलग-अलग तारीखों पर बिल्डर को कुल 22.20 लाख रुपये का भुगतान किया।
21 से 24 महीने में मिलना था कब्जा
एग्रीमेंट टू सेल के क्लाज-7 के अनुसार फ्लैट का निर्माण पूरा कर 21 से 24 महीने के भीतर कब्जा दिया जाना था। इस हिसाब से कब्जा देने की अंतिम अवधि करीब जून 2013 में समाप्त हो गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता को न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही उसकी जमा रकम वापस की गई।
मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर पक्ष अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ। नोटिस की विधिवत तामील के बावजूद जवाब नहीं देने पर 14 मई 2026 को उन्हें एक्स-पार्टी कर दिया गया।
हालांकि, रेरा ने स्पष्ट किया कि केवल बिल्डर के पेश नहीं होने से शिकायतकर्ता के आरोप अपने आप साबित नहीं माने जाएंगे। प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की।
2022 में जमीन तीसरे पक्ष को ट्रांसफर
शिकायतकर्ता ने आरटीआई के जरिए हासिल दस्तावेज भी रिकार्ड पर रखे। इनमें सामने आया कि प्रोजेक्ट की जमीन मई 2022 में मूल प्रमोटर ने तीसरे पक्ष को ट्रांसफर कर दी थी। इसके बाद 7 मार्च 2023 को इसी जमीन पर व्यावसायिक प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए लाइसेंस/अनुमति भी हासिल की गई।
शिकायतकर्ता ने रेरा को बताया कि उसने न तो अपने आवासीय फ्लैट के अधिकार छोड़ने पर सहमति दी और न ही प्रोजेक्ट को व्यावसायिक प्रोजेक्ट में बदलने की अनुमति दी।
जमा रकम पर जमा की तारीख से मिलेगा ब्याज
पंजाब रेरा ने माना कि मामला केवल कब्जा देने में देरी का नहीं है। मूल आवासीय प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ, फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया और रकम भी वापस नहीं की गई। इसलिए शिकायतकर्ता को प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर धारा 18(1) के तहत रिफंड लेने का अधिकार है।
प्राधिकरण ने आदेश दिया कि 22.20 लाख रुपये की मूल राशि वापस करने के साथ प्रत्येक किस्त पर उसकी संबंधित जमा तारीख से वास्तविक भुगतान तक नियम 16 के तहत निर्धारित ब्याज दिया जाए। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से मांगी गई 18 प्रतिशत सालाना संविदात्मक ब्याज दर को मंजूर नहीं किया गया।
90 दिन में भुगतान, नहीं तो होगी कार्रवाई
रेरा ने बिल्डर को मूल रकम और उस पर अर्जित ब्याज का भुगतान आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन नहीं होने पर शिकायतकर्ता को रेरा कानून के तहत आदेश की एग्जीक्यूशन या प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू करने की स्वतंत्रता दी गई है।
