10 हजार रिश्वत...10 साल भुगता केस; पंजाब पुलिस के दो ASI को चंडीगढ़ कोर्ट से अब मिली राहत
चंडीगढ़ कोर्ट ने पंजाब पुलिस के दो एएसआई को 10 हजार रुपये रिश्वत मामले में राहत दी है। पुलिस की ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत का फैसला।
HighLights
पंजाब पुलिस के दो एएसआई को रिश्वत मामले में राहत मिली।
चंडीगढ़ कोर्ट ने पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार की।
अभियोजन की मंजूरी नहीं मिली, आरोप साबित नहीं हुए।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। 10 हजार रिश्वत के मामले में पंजाब पुलिस के दो एएसआई को चंडीगढ़ कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अमरीक सिंह और रविंदर सिंह के खिलाफ वर्ष 2016 में दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में कोर्ट ने पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।
इनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद करने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने जिला अदालत में अर्जी दायर की थी। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हो सके थे और पंजाब पुलिस ने भी चंडीगढ़ को इनके खिलाफ केस चलाने के लिए अभियोजन मंजूरी नहीं दी थी।
10 अगस्त 2016 को सेक्टर-3 थाने में अमरीक सिंह और रविंदर सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं सात और 13(1)(डी) के तहत केस दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता जोगा राज सिंह ने आरोप लगाया था कि उसके चाचा पंजाब पुलिस में कार्यरत थे और वर्ष 1992 में आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इसके बाद उसके बेटे गुरप्रीत सिंह ने पंजाब पुलिस में भर्ती के लिए आवेदन किया था।
शिकायत के अनुसार, भर्ती की फाइल पंजाब पुलिस मुख्यालय की ई-3 शाखा में तैनात एएसआई अमरीक सिंह और रविंदर सिंह के पास थी। आरोप था कि फाइल को आगे बढ़ाने और प्रक्रिया में मदद करने के लिए दोनों पुलिसकर्मियों ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने अमरीक सिंह को तीन हजार और रविंदर सिंह को पांच हजार रुपये दिए थे। शिकायत मिलने पर चंडीगढ़ पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
अभियोजन की मंजूरी नहीं मिली
जांच के बाद दोनों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी लेने के लिए प्रस्ताव पंजाब सरकार को भेजा गया। सरकार के संबंधित विभाग ने अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
जांच एजेंसी ने भी माना कि रिश्वत मांगने या स्वीकार करने के आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस, विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी से पुलिस ने अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट पेश की।
