यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Punjab and Haryana High Court ने कहा- दुर्घटना मुआवजे पर पत्नी के साथ विवाहित बेटी का भी हक
हाई कोर्ट ने दुर्घटना में हुई पिता की मृत्यु के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि पिता की मृत्यु ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ः हाई कोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना में पिता की मृत्यु के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हमारे पारंपरिक समाज में विवाहित बेटियों पर माता-पिता उचित ध्यान देते हैं।
उन्हें त्योहार और अन्य अवसर पर नकद और अन्य प्रकार के उपहार दिए जाते हैं। ऐसे में पिता की मृत्यु के साथ बेटी न केवल उनके प्यार और स्नेह से वंचित हुई है बल्कि उसे भी इसका आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। लिहाजा मुआवजे में हिस्सा पाने की वह भी हकदार है।
ट्रक की टक्कर से हुई थी पिता की मौत
जस्टिस हरमिंदर सिंह मदान ने यह आदेश एक सड़क दुर्घटना में ट्रिब्यूनल द्वारा मृतक की विधवा को मुआवजा दिए जाने के फैसले के खिलाफ बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2016 में एक ट्रक की टक्कर से ड्राईक्लीन की दुकान चलाने वाले दुकानदार की मृत्यु हो गयी थी। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने जिस बीमा कंपनी से ट्रक का बीमा करवाया गया था, उसे मृतक की विधवा को नौ लाख 40 हजार 266 रूपये का मुआवजा दिए जाने के आदेश दिए थे।
ट्रिब्यूनल ने मृतक के दो बेटे (जो बालिग हो चुके थे) और एक धादीशुदा बेटी के दावे को खारिज करते हुए मुआवजे की पूरी राशि मृतक की विधवा को ही दिए जाने के आदेश दिए थे।
बेटी-बेटी को बराबर हिस्सा देने का आदेश
बीमा कंपनी ने मृतक की विधवा को 9.40 लाख रूपये का मुआवजा ब्याज सहित दिए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी इस याचिका को तो खारिज कर दिया लेकिन ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मुआवजे की पूरी राशि केवल मृतक की विधवा को कैसे दी जा सकती है।
हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले में संशोधन कर मुआवजे की राशि में से 55 प्रतिशत मृतक की विधवा और शेष राशि 15-15 प्रतिशत के बराबर हिस्से में दोनों बेटों और विवाहित बेटी को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
