138 अंकों के बावजूद नियुक्ति क्यों नहीं? पंजाबी टीचर भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने मांगा अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने पंजाबी मास्टर कैडर भर्ती विवाद में शिक्षा विभाग को दो सप्ताह में अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया ...और पढ़ें

पंजाबी विषय के मास्टर कैडर की भर्ती में चयन का मामला पहुंचा हाईकोर्ट। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को दो सप्ताह का समय दिया।
आदेश न मानने पर अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी।
पंजाबी विषय के मास्टर कैडर की भर्ती का विवाद।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाबी विषय के मास्टर कैडर की भर्ती में चयन को लेकर विवाद अब शिक्षा विभाग के फैसले में देरी पर केंद्रित हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग को दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने और उसे अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने चेताया कि तय समय में आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। याचिका के अनुसार, आठ जनवरी, 2022 को जारी भर्ती विज्ञापन में पंजाबी विषय के 534 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
चार सितंबर, 2022 को हुई लिखित परीक्षा में जसवीर कौर ने 138 अंक हासिल किए। दस्तावेजों की जांच के बाद 16 दिसंबर, 2022 को जारी चयन सूची में उन्हें नियुक्ति नहीं मिली और वह प्रतीक्षा सूची में छठे स्थान पर रहीं।
याचिका में कहा गया कि बुटा सिंह मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिणाम संशोधित किया गया। संशोधित चयन सूची में 137 अंक पाने वाले अभ्यर्थी का चयन हुआ, जबकि 138 अंक हासिल करने वाली जसवीर कौर को नियुक्ति नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता ने इसे मेरिट और समान अवसर के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए नियुक्ति की मांग की है। हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर, 2026 के आदेश के मुताबिक, अदालत ने छह जुलाई को ही शिक्षा विभाग को अंतिम निर्णय लेने को कहा था।
नौ सितंबर को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने फैसला करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने समय देते हुए अगली सुनवाई पर निर्णय की जानकारी देने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना था।
निर्धारित तारीख पर शिक्षा विभाग की सचिव अदालत में पेश हुईं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दो सप्ताह में अंतिम निर्णय लेकर अदालत में पेश कर दिया जाएगा और अगली सुनवाई पर समय बढ़ाने की मांग नहीं की जाएगी। मामले को 31 अक्टूबर, 2026 के लिए सूचीबद्ध कर तत्काल सुनवाई की सूची में रखने का निर्देश दिया गया है।
