पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तरनतारन के 46 कर्मचारियों की सेवाएं नियमित; 2016 से मिलेगा वेतनमान और लाभ
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने तरनतारन जिले के 46 कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने और उन्हें 24 दिसंबर, 2016 ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो
HighLights
हाईकोर्ट ने तरनतारन के 46 कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया।
कर्मचारियों को 24 दिसंबर, 2016 से समान वेतनमान व अन्य लाभ मिलेंगे।
सरकार को बकाया राशि पर ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को तरनतारन जिले के 46 कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने और नियमित कर्मचारियों के समान वेतनमान व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल की अदालत ने कहा कि नियमितीकरण पर पहले निर्णय लेने और लाभ देने का आश्वासन देने के बाद अधिकारी दोबारा आपत्ति उठाकर कार्रवाई लंबित नहीं रख सकते।
अदालत ने कर्मचारियों को 24 दिसंबर, 2016 से नियमितीकरण प्रभावी होने की तारीख तक समान वेतनमान और अन्य परिणामी लाभ देने का आदेश दिया। इस राशि पर वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामला निशान सिंह व अन्य की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे वर्ष 2006 से पहले आउटसोर्सिंग के जरिये और बाद में पंजाब सरकार के अधीन अनुबंध आधार पर काम कर रहे थे।
हाई कोर्ट ने दिया था आदेश
उन्होंने नियमितीकरण के साथ नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और अन्य लाभ मांगे थे। 26 जुलाई, 2021 को हाईकोर्ट ने अधिकारियों को उनकी मांग पर कारण सहित आदेश पारित करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद तरनतारन के तत्कालीन उपायुक्त ने छह अगस्त, 2021 को कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे को स्वीकार कर आगे की कार्रवाई के लिए मामला वित्तीय आयुक्त (राजस्व) को भेजा। राज्य सरकार ने इसे केवल सिफारिश बताते हुए अंतिम निर्णय लंबित रखा।
सुनवाई में सरकार ने कहा कि संबंधित कानून लागू होने की तारीख पर कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे थे, इसलिए नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस दलील पर सवाल उठाया।
11 अगस्त को आदेश जारी करने का दिया आश्वासन
अदालत के अनुसार, 11 अगस्त, 2026 को राज्य के महाधिवक्ता और वित्तीय आयुक्त ने कर्मचारियों को नियमितीकरण तथा समान कार्य के लिए समान वेतन का पात्र माना था और दो दिन में आवश्यक आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में विपरीत रुख अपनाना अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के अनुरूप नहीं था। राज्य सरकार अदालत में एक रुख अपनाकर बाद में उसी कार्यवाही में उससे उलट रुख नहीं ले सकती।
अदालत ने पंजाब के वर्ष 2016 के संबंधित कानून के प्रभावी होने की तारीख से सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया। नियमितीकरण के बकाये पर देय तिथि से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। हालांकि, बकाया लाभ की गणना याचिका दायर करने की तारीख 22 जुलाई, 2021 से पहले के 36 महीनों तक सीमित रहेगी।'
