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पंजाब में महिला ने 4 पुराने मुकदमे छिपाकर मांगी अग्रिम जमानत, हाई कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:09 PM (GMT+05:30)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आपराधिक इतिहास छिपाकर अग्रिम जमानत मांगने वाली महिला पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

मुकदमे छिपाकर अग्रिम जमानत मांगने वाली महिला पर हाई कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना।

मुकदमे छिपाकर अग्रिम जमानत मांगने वाली महिला पर हाई कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना।

HighLights

  1. आपराधिक इतिहास छिपाने पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज

  2. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 50 हजार जुर्माना लगाया

  3. न्यायिक प्रक्रिया में जानकारी छिपाना गंभीर प्रयास माना

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत मांगने वाली एक महिला याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि जमानत मांगने वाला व्यक्ति अपने आपराधिक इतिहास को छिपाकर अदालत से विवेकाधीन राहत हासिल नहीं कर सकता।

जस्टिस सुमित गोयल ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना महज तकनीकी चूक नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास है। मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा लुधियाना में दर्ज किया गया था।

याचिकाकर्ता ने स्वापक औषधि एवं मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धाराओं 8, 21 और 29 के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में स्वयं को पहली बार अपराध करने वाला बताते हुए कहा था कि उसके खिलाफ वर्तमान मामले के अलावा कोई अन्य मामला दर्ज नहीं है।

उसने यह भी घोषित किया था कि वह किसी अन्य मामले में आरोपित नहीं है और न ही उसे कभी भगोड़ा घोषित किया गया। सुनवाई के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने इसका विरोध करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ चार अन्य मामले दर्ज हैं। इनमें 2017 के दो मामले, 2023 का एक मामला और 2025 का एक मामला शामिल है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार ये मामले स्वापक औषधि एवं मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम तथा अन्य आपराधिक धाराओं से संबंधित हैं।

अदालत ने पाया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की आपत्ति के बाद याचिकाकर्ता ने संशोधन अर्जी दाखिल कर अपने पुराने मामलों का खुलासा किया। हालांकि, वह यह बताने में असफल रही कि मूल अर्जी और अपने शपथपत्र में इन मामलों को पहले क्यों छुपाया गया। कोर्ट ने कहा कि अदालत में आने वाले व्यक्ति का अपने आपराधिक इतिहास का पूरा और सही खुलासा करना आवश्यक है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के नियमों के अनुसार भी जमानत अर्जी में यह बताना अनिवार्य है कि आवेदक किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल है या नहीं और यदि है तो उसका पूरा विवरण देना होगा। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर छिपाए और बाद में भी उनके छिपाए जाने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। इसलिए उसने अग्रिम जमानत पाने का अपना अधिकार खो दिया।

हाई कोर्ट ने मामले के आरोपी और जांच में जुटाई गई सामग्री के गुण-दोष पर विस्तार से विचार करना जरूरी नहीं समझा और याचिका खारिज कर दी। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना चार सप्ताह के भीतर लुधियाना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जमा करने का आदेश दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाए। राशि जमा न करने पर लुधियाना के उपायुक्त को इसे भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूलने की कार्रवाई करने को कहा गया है।