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PLPA डीलिस्टेड जमीन मामलों में पंजाब सरकार लाएगी सिंगल सर्कुलर, आवेदकों को मिलेगी राहत

Published: Thu, 17 Sep 2026 11:49 AM (IST)

पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने पंजाब सरकार से पीएलपीए डीलिस्टेड जमीनों से जुड़े मामलों में एक संयुक्त सर्कुलर जारी करने का आग्रह किया है।

पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान (फाइल फोटो)

पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पीएलपीए डीलिस्टेड जमीनों के लिए संयुक्त सर्कुलर जारी करने की मांग

  2. एक नियामक प्राधिकरण और सिंगल खसरा स्टेटस सर्टिफिकेट हो मान्य

  3. नयागांव के परिवारों को भवन नक्शे, सीवर कनेक्शन में मिलेगी राहत

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (पीएलपीए), 1900 से डीलिस्ट की गई जमीनों से जुड़े मामलों में अलग-अलग विभागों के बीच फंसे आवेदकों के लिए पंजाब सरकार एक संयुक्त सर्कुलर जारी करे।

इसमें हर डीलिस्टेड खसरे की स्थिति स्पष्ट करने के साथ एक ही नियामक प्राधिकरण तय किया जाए और सभी विभागों के लिए एक ही खसरा स्टेटस सर्टिफिकेट मान्य हो।

इस संबंध में पूर्व विशेष मुख्य सचिव और पूर्व वित्तीय आयुक्त राजस्व केबीएस सिद्धू ने पंजाब के मुख्य सचिव और संबंधित प्रशासनिक सचिवों को पत्र भेजकर कई सुझाव दिए गए हैं।

पत्र में पंजाब वन विभाग की ओर से 14 सितंबर को जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का स्वागत करते हुए कहा गया है कि इससे वन मंजूरी के मामलों में जरूरी दस्तावेजों की एक स्पष्ट चेकलिस्ट सामने आई है।

एसओपी में बंद और खुले पीएलपीए क्षेत्रों से जुड़े मामलों के लिए 13 आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उचित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और आसपास के चो, नालों व झरनों के संबंध में मंडल वन अधिकारी की रिपोर्ट को भी इसमें शामिल किया गया है।

विभागों के बीच तालमेल बनी बड़ी समस्या

लेकिन भवन नक्शे, जमीन के उपयोग में बदलाव का प्रमाणपत्र और मास्टर प्लान संबंधी प्रमाणपत्र को लेकर विभागों के बीच तालमेल की समस्या बनी हुई है। पत्र में कहा गया है कि नगर निकाय सीमा से बाहर इन दस्तावेजों से जुड़े मामलों में गमाडा और नगर निकायों की भूमिका है, जबकि संबंधित विभाग कई मामलों में पहले वन विभाग की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करते हैं।

ऐसे में आवेदक एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं। सिद्धू ने 16 सितंबर को मुख्य सचिव को भेजे डीओ पत्र के साथ प्रस्तावित संयुक्त सर्कुलर का प्रारूप भी संलग्न किया है।
चार श्रेणियों में बांटे जाएं डीलिस्टेड खसरे

प्रस्ताव में प्रत्येक डीलिस्टेड खसरे को चार श्रेणियों में रखने और हर श्रेणी के लिए एक नियामक प्राधिकरण तय करने की बात कही गई है। साथ ही एक ऐसा खसरा स्थिति प्रमाणपत्र जारी करने का सुझाव है, जिसे सभी विभाग मानें। निर्णय लेने के लिए समयसीमा तय करने और यह स्पष्ट करने की मांग भी की गई है कि व्यावसायिक उपयोग पर रोक जारी रहेगी।

नयागांव के परिवारों को राहत देने की मांग

पत्र में नयागांव नगर परिषद के तहत आने वाले कांसल, करोरां और नाडा के आबाद हिस्सों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। यहां तीन और चार मरले के प्लाटों पर रह रहे परिवार लंबे समय से भवन नक्शे और सीवर कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सुझाव दिया गया है कि सीमांकन की शुरुआत करोरां और नाडा के आबाद नगर हिस्सों से की जाए। मौजूदा घरों को अदालत की अनुमति के अधीन शुल्क लेकर पानी और सीवर कनेक्शन देने का रास्ता भी तलाशने को कहा गया है, जिससे इसे जमीन की नियमितता न माना जाए।

इसके अलावा पंजाब में सुखना इको-सेंसिटिव जोन को अंतिम रूप देने का सुझाव दिया गया है। केंद्र की 2009 की डीलिस्टिंग मंजूरी की शर्तों और अदालत के आदेश में बदलाव न हो, इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से स्पष्टीकरण लेने तथा एडवोकेट जनरल के माध्यम से हाई कोर्ट में आवेदन करने की बात भी पत्र में कही गई है।

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