'स्थिति बदल चुकी है', गमाडा में ED की रेड पर पंजाब सरकार ने HC से वापस ली याचिका; अधिकारियों का अवैध हिरासत से इनकार
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गमाडा मुख्यालय में ईडी की कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका वापस लेने की अनुमति दी है।

गमाडा में ED की रेड पर पंजाब सरकार ने HC से वापस ली याचिका। फाइल फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिका वापस लेने की अनुमति दी।
ईडी तलाशी पूरी होने और अधिकारियों की रिहाई के बाद फैसला।
वारंट अधिकारी ने गमाडा में स्थिति की जांच की, रिपोर्ट सौंपी।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गमाडा मुख्यालय में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी।
जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ के समक्ष पंजाब सरकार ने कहा कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं, तलाशी पूरी हो गई है और जिन अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाया गया था, उन्हें मुक्त कर दिया गया है।
हाई कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए पंजाब सरकार को कानून के अनुसार उचित मंच पर सभी मुद्दे उठाने की स्वतंत्रता दी है।
रात में वारंट अधिकारी ने गमाडा पहुंचकर की जांच
हाई कोर्ट के 23 सितंबर के आदेश के बाद रजिस्ट्रार स्तर के वारंट अधिकारी राजन नंदा ने रात करीब 2:50 बजे गमाडा कार्यालय पहुंचकर स्थिति की जांच की। उनके साथ चंडीगढ़ पुलिस और मोहाली पुलिस के अधिकारी तथा पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता फेरी सोफत भी मौजूद थे।
वारंट अधिकारी ने उन अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की, जिनके नाम पहले हाई कोर्ट के आदेश में दर्ज थे। रिपोर्ट के अनुसार सभी अधिकारियों ने बताया कि उन्हें परिसर में अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया और उन पर किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या कोई बात मानने का दबाव नहीं बनाया गया।
अधिकारियों को घर जाने और स्वजन से मिलने की भी अनुमति
वारंट अधिकारी की रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधान सचिव विकास गर्ग को करीब दो घंटे के लिए घर जाने की अनुमति दी गई थी। अमन गुप्ता को अपने भाई से मिलने और रोहित जिंदल को परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति दी गई।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि उनके परिवार और मित्रों को उनके लिए भोजन लाने की अनुमति थी। महिला कर्मचारियों को शाम छह से साढ़े छह बजे तक परिसर से जाने की अनुमति दिए जाने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।
सात अधिकारियों को सर्वे और तलाशी वारंट
ईडी अधिकारियों ने वारंट अधिकारी को बताया कि सात अधिकारियों को सर्वे वारंट दिए गए थे। जांच अधिकारी ने 22 सितंबर के सात सर्वे प्राधिकरण और सात तलाशी प्राधिकरण के मूल दस्तावेज भी वारंट अधिकारी को दिखाए।
रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मूल अपराध का विवरण प्रत्येक तलाशी वारंट में दर्ज था। ईडी की फोरेंसिक टीम अधिकारियों के मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आवश्यक दस्तावेज और सूचना डाउनलोड, कॉपी या क्लोन कर रही थी।
तलाशी पूरी होने के बाद याचिका वापस
अदालत ने दर्ज किया कि बाद की परिस्थितियों में तलाशी पूरी हो चुकी थी और कथित हिरासत में रखे गए अधिकारियों को मुक्त कर दिया गया था। इसके बाद पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने याचिका वापस लेने की मांग की।
अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कानूनी मुद्दे खुले रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उनका उचित मंच पर निर्णय हो सकता है।
वारंट अधिकारी की फीस 55 हजार रुपये तय
हाई कोर्ट ने वरिष्ठ स्तर के अधिकारी को वारंट अधिकारी नियुक्त किए जाने को देखते हुए उनकी फीस 55 हजार रुपये निर्धारित की है। यह राशि पंजाब सरकार को 28 सितंबर तक हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
