जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल सेक्टर-16 में केमिस्ट शाप का मामला नंबर-6 के मामले में अब जांच कमेटी का गठन किया गया है। हेल्थ सेक्रेटरी यशपाल गर्ग ने एडिशनल सेक्रेटरी हेल्थ अखिल कुमार की अध्यक्षता में यह कमेटी बनाई है। जीएमएसएस-16 के ही डा. परमजीत सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अनिल कुमार शर्मा, सीनियर आर्किटेक्ट राजीव मेहता को कमेटी मेंबर बनाया गया है।

दरअसल इस शाप को जिस साइज में आवंटित किया गया था उसे आगे बढ़ा लिया गया। रास्ते और केमिस्ट शाप के बीच की दीवार को हटाकर इसे शाप में मिलाने का आरोप है। कमेटी जांच के लिए कोई भी प्रक्रिया अपना सकती है। कमेटी उपलब्ध रिकार्ड देख सकती है संबंधित लोगों, अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों से बात कर सकती है। कमेटी को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। केमिस्ट शाप का एरिया कितना था जब सबसे पहले 28 दिसंबर 1992 को आक्शन की गई।

18 फरवरी 1993 को जब यह शाप सौंपी गई तब एरिया और वर्तमान में केमिस्ट शाप कितने एरिया को कवर कर रही है। अगर एरिया में कोई बदलाव मिलता है तो यह पता लगाया जाएगा किया बीच की दीवार कब हटाई गई उस दौर के अधिकारियों की भूमिका देखी जाएगी। अगर एरिया में कोई बदलाव मिलता है तो अतिरिक्त एरिया के डैमेज चार्जेस क्या होंगे। शाप नंबर-1 का साइज और इसके शाप नंबर-6 से बराबर होने के कोई कारण तो नहीं हैं।

अफसरों की संलिप्तता जांचेगी विजिलेंस

केमिस्ट शाप और रास्ते के बीच की दीवार हटाने की जिम्मेदारी जांच कमेटी को सौंपी गई है। वहीं 29 वर्षाें से फ्रेश टेंडर जारी क्यों नहीं हुआ। पीजीआइ में एक केमिस्ट शाप का मासिक किराया जहां एक करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं जीएमएसएच की इस शाप से ढाई लाख रुपये किराया लिया जा रहा था। पुराने टेंडर को ही एक्सटेंड क्यों किया जाता रहा। इसमें हास्पिटल के अधिकारियों की भूमिका देखने के लिए मामला विजिलेंस को भी सौंपने की तैयारी है। शाप का आकार देखने के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों की संलिप्तता विजिलेंस देखेगी।

Edited By: Vinay Kumar

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