चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। आर्थिक संकट से जूझ रही पंजाब सरकार को अब रेवेन्यू बढ़ाने के स्रोत ढूंढने में दिक्कत आ रही है। टैक्स लगाकर सरकार पहले ही पेट्रोल, बिजली व शराब काफी महंगा कर चुकी है। अब सरकार को कोई ऐसा स्रोत नजर नहीं आ रहा जिस पर वह टैक्स लगाए। अब उसकी नजर नॉन टैक्स रेवेन्यू पर है। जीएसटी से भी सरकार को जितनी आमदनी होने की उम्मीद थी, उतनी न होने के चलते सारा दबाव नॉन टैक्स रेवेन्यू पर बढऩे लगा है।

पड़ोसी राज्यों में नॉन टैक्स रेवेन्यू से आय पंजाब से चार गुना, जीएसटी से टैक्स बढ़ाने की संभावनाएं खत्म

सरकार ने जीएसटी से 21440 करोड़ रुपये आने का अनुमान लगाया था, लेकिन इसमें 1586 करोड़ कम मिलने की उम्मीद है। उम्मीद के मुताबिक सरकार को जीएसटी से रेवेन्यू नहीं आ रहा है। जीएसटी के बाद टैक्स लगाने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैैं।

 

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दो दिन पहले वित्त विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख और प्रशासनिक सचिवों की बैठक चीफ सेक्रेटरी करण अवतार सिंह के जरिए बुलवाई थी। इसमें नॉन टैक्स रेवेन्यू को बढ़ाने की बात रखी गई। इस मीटिंग में स्कूलों, अस्पतालों, रेवेन्यू विभागों की फीसों में बढ़ोतरी करने का मसौदा तैयार करने को कहा गया ताकि इस पर कोई फैसला ले सकें। बताया जाता है कि ज्यादातर विभागों ने कहा कि वे तैयारी के साथ नहीं आए हैं। इसलिए इस मुद्दे पर फिर से मीटिंग बुलाई जाए।

क्या है नॉन टैक्स रेवेन्यू

टैक्सों के अलावा सरकार को नॉन टैक्स रेवेन्यू से आमदनी होती है। यह स्कूलों, अस्पतालों, रेवेन्यू विभाग समेत विभिन्न विभागों में लगाई गइ फीसों से मिलती है, लेकिन ये काफी कम है। मसलन 2018-19 में यह आमदनी 10248 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। साल 2017-18 में 3224 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान लगाया गया था। बाद में इसे संशोधित किया गया था। तमाम कोशिशों के बाद भी उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं हो रही है।

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वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने मीटिंग में कहा कि पड़ोसी राज्यों में नॉन टैक्स रेवेन्यू से आमदनी पंजाब से चार गुना है। पिछले कई सालों से पंजाब में कई तरह की फीसों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। आज भी फीस के रूप में कहीं-कहीं दो-दो रुपये लिए जा रहे हैं। इससे कहीं ज्यादा तो पार्किंग फीस वसूल की जा रही है। मुझे लगता है कि  ये फीसें तर्कसंगत होनी चाहिए।

1500 करोड़ की एआरएम की जरूरत

वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने बीते मार्च में जो बजट पेश किया था उसमें 1500 करोड़ रुपये की एडिशनल रिसोर्स मोबलाइजेशन (एआरएम) की बात कही थी। छह महीने बाद भी इस ओर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है।

पंजाब की वित्तीय स्थिति

पंजाब इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। 31 हजार करोड़ रुपये पूर्व सरकार ने फूड अकाउंट के नाम पर डाल दिया जिस पर 3270 करोड़ रुपये ब्याज देना पड़ रहा है। इसके अलावा 16260 करोड़ रुपये का ब्याज पंजाब के सिर चढ़े 2.11 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पर जा रहा है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha