विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पंजाब कांग्रेस में उठे बगावती सुर, चन्नी की लगातार दूसरी बैठक से हलचल बढ़ी; संगठन में असंतोष की चर्चाएं तेज

By Dr. Sumit Singh SheoranEdited By: Anuj Sharma
Published: Fri, 03 Jul 2026 12:28 PM (IST)

नई संगठनात्मक सूची के बाद पंजाब कांग्रेस में असंतोष की चर्चा तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लगातार ...और पढ़ें

PPCC प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी।

PPCC प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी।

HighLights

  1. पूर्व सीएम चन्नी की लगातार बैठकों से कांग्रेस में हलचल तेज।

  2. नए संगठनात्मक ढांचे पर वरिष्ठ नेताओं में गहरा असंतोष।

  3. हाईकमान असंतुष्ट नेताओं से संवाद कर स्थिति संभालेगा।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी नई संगठनात्मक सूची को लेकर पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। संगठन में किए गए फेरबदल के बाद कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों ने खुलकर तो नहीं, लेकिन नाराजगी के संकेत दिए हैं।

इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लगातार दूसरे दिन अपने समर्थक विधायकों, पूर्व मंत्रियों और करीबी नेताओं की मोरिंडा स्थित आवास पर बैठक बुलाई, जिससे पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गर्मा गई है।

वीरवार को भी चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ बैठक कर नए संगठनात्मक ढांचे और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की थी। शुक्रवार को एक बार फिर उनके आवास पर समर्थक नेताओं का जुटना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर असंतोष केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लेकर आगे की रणनीति पर भी मंथन किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- अवैध वसूली-टैक्स पर विवाद सुलझा, कश्मीर पशुधन कारोबारियों की हड़ताल खत्म, CM उमर के पत्र के बाद पंजाब का एक्शन

नई संगठनात्मक सूची की हुई थी घोषणा

दरअसल, कांग्रेस हाईकमान ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पंजाब संगठन का नया ढांचा घोषित किया है। इसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने के साथ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि, संगठन की इस सूची का स्वागत पार्टी के केवल कुछ नेताओं ने ही सार्वजनिक रूप से किया, जबकि अधिकांश वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे हुए हैं।

चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी पहले ही सोशल मीडिया पर सांकेतिक टिप्पणी कर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। वहीं वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी नए संगठनात्मक फेरबदल पर खुलकर उत्साह नहीं दिखाया। पार्टी के भीतर ऐसे नेताओं की संख्या भी कम नहीं बताई जा रही है, जो मानते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में व्यापक बदलाव की जरूरत थी और पुराने नेतृत्व को बरकरार रखने का फैसला अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा।

यह भी पढ़ें- पठानकोट में पुरानी रंजिश ने ली 30 वर्षीय युवक की जान, मोहल्ले में घेरकर तेजधार हथियारों से हमला; एक गंभीर घायल

हाईकमान बुला सकती है असंतुष्ट नेताओं को

कांग्रेस ने संगठनात्मक फेरबदल को लेकर असंतुष्ट नेताओं को समय रहते साथ नहीं लिया गया तो विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की चुनावी तैयारियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें चन्नी की बैठकों और उनके बाद पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हैं।

आने वाले दिनों में हाईकमान असंतुष्ट नेताओं से संवाद कर स्थिति संभालने की कोशिश कर सकता है, क्योंकि चुनाव से पहले किसी भी तरह की गुटबाजी कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है।

यह भी पढ़ें- सुरक्षा दस्तावेज लीक केस में बठिंडा के हिंदू नेता संदीप पाठक को राहत, हाईकोर्ट से मिली जमानत; जेल से हुए रिहा