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पंजाब के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट का कारण बताओ नोटिस, दर्ज हो सकती है आपराधिक अवमानना की कार्रवाई

Published: Tue, 06 Oct 2026 12:45 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने डीए मामले में राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को अदालत को गुमराह करने पर नोटिस दिया

  2. सुप्रीम कोर्ट एसएलपी में खामियां दूर करने का दावा झूठा पाया गया

  3. मुख्य सचिव को शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में खामियां दूर किए जाने के मुख्य सचिव के दावे को हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया “स्पष्ट रूप से झूठा” पाया।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ जानबूझकर अदालत को गुमराह करने के आरोप में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। मुख्य सचिव को शुक्रवार को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से प्राप्त स्थिति रिपोर्ट के आधार पर दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में रजिस्ट्री द्वारा बताई गई खामियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं।

इसी तरह पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की अपील भी खामियों के चलते लंबित है। हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सोमवार को उसके समक्ष गलत बयान दिया गया।

सोमवार को मुख्य सचिव ने दिया था हलफनामा

मामले की पिछली सुनवाई सोमवार को हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

मुख्य सचिव भी अदालत में उपस्थित हुए थे और उन्होंने हलफनामा दाखिल किया था। राज्य की ओर से कहा गया था कि अपील में बताई गई खामियां दूर कर दी गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस दावे का विरोध किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने तत्काल सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से स्थिति रिपोर्ट मंगवाई थी।


मंगलवार को रिपोर्ट सामने आने के बाद पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव की ओर से अदालत के समक्ष तथ्यों का जानबूझकर गलत उल्लेख किया गया प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव द्वारा अदालत को गुमराह करने के लिए गलत तथ्य पेश किए गए हैं।

पहले भी राज्य सरकार के रवैये पर जताई थी नाराजगी

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सात सितंबर को उसने कोई आदेश पारित नहीं किया था और राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किए जाने की जानकारी मिलने के बाद दोनों पक्षों के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित की गई थी। दस सितंबर को भी राज्य के अनुरोध पर सुनवाई टाली गई ताकि उसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आ सके।

22 सितंबर को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया था कि राज्य की अपील अभी भी खामियों में फंसी हुई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राज्य की ओर से मामले के समाधान का गलत प्रचार किया जा रहा है, जबकि पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है।

पीठ ने कहा कि इसी कारण मुख्य सचिव को अदालत में बुलाया गया था, ताकि राज्य पहले अपनी अपील की खामियां दूर करवाए और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध कानूनी उपाय का इस्तेमाल करे।

राज्य ने कहा खंडपीठ अब कार्यमुक्त हो चुकी है

राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि फैसला सुनाए जाने के बाद खंडपीठ इस मामले में कार्यमुक्त हो चुकी है और कथित अवज्ञा का विषय पहले से दायर अवमानना याचिका में ही देखा जाना चाहिए। राज्य की ओर से अनुच्छेद 215 के तहत दायर आवेदन को लेकर ‘पीठ तलाशने’ का आरोप भी लगाया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अनुच्छेद 215 के तहत आवेदन दायर करने वाले कई लोग मूल याचिकाकर्ता या मामले में हस्तक्षेपकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि तीन अगस्त के फैसले में मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।

डीए की बकाया किस्तों का है विवाद

यह पूरा विवाद पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की बकाया किस्तों के भुगतान से जुड़ा है। तीन अगस्त को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की अपीलें खारिज करते हुए एकल पीठ के निर्देशों को बरकरार रखा था। साथ ही भुगतान की समयसीमा में संशोधन करते हुए लंबित डीए और महंगाई राहत की किस्तें जारी करने के निर्देश दिए थे।

सोमवार को हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति को लेकर पंजाब सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके “लुकाछिपी” वाले रवैये पर नाराजगी जताई थी। अब सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट के बाद मुख्य सचिव को आपराधिक अवमानना की संभावित कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।