पंजाब विधानसभा में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव ला सकती है मान सरकार, SIR में गड़बड़ी का आरोप
पंजाब सरकार विधानसभा सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव मतदाता सूची ...और पढ़ें

विधानसभा में सरकार ला सकती है मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव।
HighLights
पंजाब सरकार विधानसभा में लाएगी CEC के खिलाफ प्रस्ताव।
मतदाता सूची पुनरीक्षण में गड़बड़ियों की जांच की मांग।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल।
रमनजीत सिंह मणकू, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान सत्तारूढ आम आदमी पार्टी की सरकार राजनीतिक तौर पर बड़ा कदम उठाने जा रही है।
पता चला है कि मौजूदा सत्र के दौरान सरकार की तरफ से न सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव लाने की योजना बनाई गई है, बल्कि मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित तौर पर मतदाता सूचियों में हुई गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग भी प्रस्ताव में शामिल किए जाने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक देशभर में व्याप्त रोष के मद्देनजर पंजाब सरकार विधानसभा में प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है, जिसमें भारतीय लोकतंत्र में दी गई समानता, न्याय और जनता की संप्रभुता के सिद्धांतों पर आधारित वोट का अधिकार पर चर्चा की जाएगी।
सरकार के प्रस्ताव में हाल ही में संपन्न हुए एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने और पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने को लेकर सामने आ रही गंभीर आपत्तियों और शिकायतों का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल शामिल किए जाने पर विचार हो रहा है।
यह भी संभावना है कि सरकारी प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से संबंधित फैसलों पर उठी आपत्तियों को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की जाएगी। साथ ही जांच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच तंत्र स्थापित करने की भी मांग की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं के पारदर्शी एवं निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व जवाबदेही वाले तंत्र की स्थापना संबंधी सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं। ध्यान रहे कि विधानसभा सदन द्वारा पारित होने पर प्रस्ताव को केंद्र सरकार के साथ-साथ देश के संवैधानिक पदों पर आसीन शख्सियतों को भी भेजा जाता है ताकि विधानसभा के सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं से उन्हें अवगत करवाया जा सके।
