जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा केे बजट सत्र में डीजीपी दिनकर गुप्ता और कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु ने सरकार की परेशानी को बढ़ा दिया है। विधानसभा के अंदर व बाहर आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के विधायक दिनकर गुप्ता और भारत भूषण आशु को बर्खास्त करने की मांग को लेकर धरना व नारेबाजी करते रहे। प्रश्नकाल के दौरान भी हंगामा जारी रहा। एक बार तो स्पीकर ने विपक्षी विधायकों को मार्शल को बाहर ले जाने को कहा। जब मार्शल आप के विधायक जय किशन रूडी को उठाने के लिए आए तो वो भिड़ गए।

प्रश्नकाल के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो फिर नारेबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस और अकाली दल विधायक एक-दूसरे के विरुद्ध नारेबाजी पर उतर आए। वहीं, आप विधायकों ने सदन में पर्चे फाड़े। स्पीकर को कार्यवाही 15 मिनट तक स्थगित करनी पड़ी और विपक्ष को बाहर निकालने के आदेश दिए। इसके बाद अकाली दल और आप के विधायक अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए।

इससे पूर्व, सदन में प्रश्नकाल शुरू होते ही आप और अकाली दल के विधायक वेल में पहुंच गए। उन्होंने डीजीपी और आशु के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उस समय सदन के नेता मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सदन में मौजूद नहीं थे, जबकि आशु सदन में ही मौजूद हैं। अकाली विधायकों के हंगामे के कारण प्रश्न काल में व्यवधान पैदा हुआ। अकाली विधायक आशु के खिलाफ हाथों में तख्ती लिए हुए हैं। सदन में भारी शोर शराबे के बीच प्रश्नकाल हुआ।

पंजाब आम आदमी पार्टी के विधायक विधानसभा के बाहर नारेबाजी करते हुए।

डीजीपी का इसलिए हो रहा विरोध

श्री करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को लेकर डीजीपी ने एक कार्यक्रम में कथित रूप से बयान दिया था। डीजीपी ने पहले कहा था कि करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से पाकिस्तान जाने वाले वापस आने तक आतंकी बनाए जा सकते हैैं। छह घंटे में कोई भी बम बनाना सीख सकता है। हालांकि बाद में स्पष्ट किया कि उनके कहने का भाव था कि खतरा श्रद्धालुओं से नहीं बल्कि पाकिस्तान में बैठे भारत विरोधी ताकतों से है। अकाली दल ने डीजीपी के इस बयान पर चेतावनी दी थी कि जब तक डीजीपी माफी नहीं मांगते तब तक विधानसभा को चलने नहीं दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी का भी रुख कमोवेश यही है। 

आशू का इसलिए विरोध

28 साल पुराने टाडा के केस में कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु पर एक निलंबित डीएसपी बलविंदर सेखों द्वारा गंभीर आरोप लगाना विपक्ष के हाथों में 'बटेर' लगने की तरह है। आप भी अब सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में आ गई है। मामला चूंकि कैबिनेट मंत्री का है, इसलिए आप किसी भी सूरत में इस मुद्दे को हाथ से निकलने नहीं देना चाहती है। आप के विधायक अमन अरोड़ा का कहना है कि कैबिनेट मंत्री ने एसपी रैंक के अधिकारी के पास आतंकवादियों को शरण देने की बात स्वीकारी थी तो यह बहुत गंभीर मुद्दा है। कुल मिलाकर अकाली दल व आप के हाथ बैठे-बैठाए दो मुद्दे लग गए हैं। अकाली दल के विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया पहले ही कह चुके हैं कि विधानसभा तब तक नहीं चलेगी जब तक डीजीपी माफी नहीं मांग लेते। 

पिछले साल भी उठा था आशु का मुद्दा

लुधियाना के ग्र्रैंड मैनर होम्स को लेकर भारत भूषण आशु अक्सर ही विवादों के घेरे में आ जाते हैं। पिछले साल भी विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा उठा था। जिस पर तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने दोषियों के खिलाफ पर्चा दर्ज करवाने का भरोसा दिया था। विपक्ष ने आशु का इस्तीफा मांगा था। 

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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