PU Election: छात्र संगठनों की नहीं, सियासी दलों की हो रही परीक्षा, समीकरण साधने में जुटे
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गए हैं। एनएसयूआई और एसओआई के सामने वापसी की चुनौती है।

सभी दल अपने छात्र संगठनों के जरिए दमखम दिखाने में पूरी ताकत झोंक रहे। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
पीयू चुनाव पंजाब विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं।
पिछले चुनाव में एबीवीपी की जीत ने सियासी समीकरण बदल दिए थे।
एनएसयूआई और एसओआई के सामने इस बार वापसी की बड़ी चुनौती है।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव पंजाब की सियासी पिच के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पीयू चुनाव को सभी सियासी दलों के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा है।
पंजाब चुनाव अगले माह की शुरुआत में होंगे, जिसमें छह माह से भी कम का समय बचा है। इस कारण सभी दल अपने छात्र संगठनों के जरिए दमखम दिखाने में पूरी ताकत झोंक रहे है।
असल मायनों में पीयू चुनाव में एबीवीपी, सोई, एनएसयूआई,एएसएपी की नहीं बल्कि बीजेपी, अकाली, कांग्रेस और आप की परीक्षा हो रह रही है। इस बार सभी संगठनों की लड़ाई जीत से अधिक वर्चस्व की दिखाई दे रही है।
बीते वर्ष के पीयू छात्रसंघ चुनाव के नतीजों से सबको चौंका दिया था। 33 चुनाव के अनुभव के बाद 34वें चुनाव में एबीवीपी ने अपना अध्यक्ष बनाते हुए जीत दर्ज कर नए सियासी मायने गढ़े थे।
वहीं, चुनावी दंगल में बीजेपी की एबीवीपी ने कांग्रेस की एनएसयूआइ और आप की एसएसपी को धूल चटाई थी। इसके साथ ही अकाली दल की सोई चुनाव में वर्चस्व की लड़ाई लड़ने में पूरी तरह नाकाम दिखाई दी थी।
बता दे कि पंजाब में किसान आंदोलन के दौरान शिरोमणि अकाली दल ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ दरकिनार कर लिया था। दोनों पार्टियों को अलग होने के बाद बीते चुनाव में जहां बीजेपी पंजाब की तरह पीयू में अपनी जड़े मजबूत करती दिखाई दी थी।
वहीं, दूसरी और पीयू का सियासी बयार में अकाली दल की सोई पंजाब की तरह पीयू में स्टूडेंट्स का साथ नहीं ले पाई थी। इस चुनाव में एनएसयूआइ और सोई के सामने वापसी की चुनौती है।
पीयू में 60 प्रतिशत मतदाता पंजाब से
पंजाब यूनिवर्सिटी में 60 प्रतिशत स्टूडेंट्स पंजाब से आते है। ऐसे में पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल छात्र संगठनों के जरिए उनको साधते हुए चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए रोडमैप तैयार कर रहे हैं। वहीं, पंजाब के चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है।
| पार्टी | छात्र संगठन |
|---|---|
| बीजेपी | अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) |
| कांग्रेस | नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) |
| आप | एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) |
| अकाली दल | स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई) |
विशेषज्ञ की राय
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. भारत ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों की आहट के बीच पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद चुनावों का महत्व बढ़ जाता है। कई छात्र संगठनों को मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन व संरक्षण प्राप्त होने के कारण ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।
विद्यार्थियों की पसंद, प्रमुख मुद्दे, राजनीतिक गठजोड़ और मतदान की प्रवृत्तियां पंजाब के युवा मतदाताओं की राजनीतिक सोच और जनभावना के महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती हैं।
हालांकि, इनके परिणामों को विधानसभा चुनाव का निश्चित पूर्वानुमान मानना उचित नहीं होगा, फिर भी ये चुनाव युवाओं की नब्ज, उनकी प्राथमिकताओं और पंजाब की संभावित राजनीतिक दिशा को समझने का महत्वपूर्ण अवसर अवश्य प्रदान करेंगे।
