PU छात्र परिषद चुनाव विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, अध्यक्ष अंकित बिढान की पात्रता पर सवाल
पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद अध्यक्ष चुनाव का विवाद अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। दूसरे स्थान पर रहे ...और पढ़ें

पीयू अध्यक्ष अंकित बिढान।
HighLights
अंकित बिढान की पात्रता पर आदिल बराड़ ने चुनौती दी।
लिंगदोह सिफारिशों का उल्लंघन और आपराधिक मामला छिपाने का आरोप।
हाईकोर्ट ने पंजाब विश्वविद्यालय समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव का विवाद अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। दूसरे स्थान पर रहे छात्र आदिल बराड़ ने निर्वाचित अध्यक्ष अंकित बिढान की पात्रता पर सवाल उठाते हुए चुनाव परिणाम को चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय समेत सभी प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे उम्मीदवार को चुनाव लड़ने और अध्यक्ष निर्वाचित होने की अनुमति दी, जो छात्र परिषद चुनाव के लिए निर्धारित लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत पात्र नहीं था।
याचिका के अनुसार, अंकित बिढान ने दिसंबर 2023 में पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एलएलबी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा दी थी। विश्वविद्यालय की ओर से 29 अप्रैल 2024 को जारी अधिसूचना में उन्हें दो वर्ष अथवा चार परीक्षाओं के लिए परीक्षा से वंचित किया गया था।
बाद में 25 जुलाई 2024 की अधिसूचना के जरिए दंड में बदलाव करते हुए उन्हें संबंधित प्रश्नपत्रों में अनुत्तीर्ण घोषित किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के परीक्षा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई थी और इसे बाद में पूरी तरह रद किए जाने का कोई प्रमाण रिकार्ड पर नहीं है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों की धारा 6.5.7 के अनुसार, उम्मीदवार का कोई पिछला आपराधिक रिकार्ड नहीं होना चाहिए और विश्वविद्यालय की ओर से उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नहीं हुई होनी चाहिए। याचिका में इसी प्रविधान को आधार बनाते हुए अंकित की उम्मीदवारी को चुनौती दी गई है।
याचिका में अंकित बिढान के खिलाफ 23 मार्च 2025 को चंडीगढ़ के पश्चिम थाना में दर्ज प्राथमिकी का भी उल्लेख किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज होने और बाद में आरोपपत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि नामांकन पत्र में इस आपराधिक मामले और लंबित कार्यवाही की पूरी जानकारी नहीं दी गई। आदिल बराड़ ने यह भी दावा किया है कि अंकित बिढान के शैक्षणिक रिकार्ड में संबंधित विषयों में रीअपीयर और अनुत्तीर्ण होने की स्थिति बनी हुई है। याचिका में कहा गया है कि अंकित को एलएलबी की डिग्री मिलने का भी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
चुनाव परिणाम रद करने और दोबारा चुनाव की मांग
आदिल बराड़ ने हाई कोर्ट से चुनाव परिणाम और उनकी जीत की घोषणा रद करने की मांग की है। साथ ही, दूसरे स्थान पर रहे याचिकाकर्ता को निर्वाचित घोषित करने अथवा अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से चुनाव कराने का आग्रह किया गया है। याचिका में अंकित बिढान को अध्यक्ष पद की शपथ लेने या कार्यभार संभालने से रोकने की अंतरिम मांग भी की गई है।
