PU सीनेट चुनाव 20 को... छात्रों के संघर्ष का नतीजा, केंद्र सरकार तक को पलटना पड़ा था फैसला
पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की 15 सीटों पर 20 सितंबर को चुनाव होंगे। यह चुनाव छात्रों ...और पढ़ें

अक्टूबर-नवंबर में पीयू सीनेट चुनाव के लिए मचा था बवाल। (एआई जनरेटेड फोटो)
HighLights
ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की 15 सीटों पर 20 सितंबर को चुनाव।
छात्रों के भारी संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने पलटा था फैसला।
51 प्रत्याशी मैदान में, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल में मतदाता।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की सीनेट में ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की 15 सीटों पर 20 सितंबर को चुनाव होगा। यह छात्रों के संघर्ष का नतीजा है। यहां तक कि आंदोलन तेज होने पर केंद्र सरकार तक को अपना फैसला पलटना पड़ा। अब 15 सीटों के लिए 51 प्रत्याशि मैदान में होने से चुनावी मुकाबला रोचक बना है।
पुराने सीनेटरों के अनुभव और नए चेहरों की दावेदारी आमने-सामने है। चुनाव में सिर्फ जीत-हार ही नहीं, बल्कि सीनेट में यूनिवर्सिटी से जुड़े मुद्दों को लेकर किस तरह की आवाज पहुंचेगी, इसे लेकर भी प्रत्याशी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने में जुटे हैं। जीत दर्ज करने के लिए प्रत्याशी एड़ी चोटी को जोड़ लगा रहे हैं।
पंजाब-हरियाणा और हिमाचल में भी मतदाता
ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता चंडीगढ़ के साथ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में फैले हैं। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार का दायरा भी कैंपस से बाहर तक पहुंच गया है। इंटरनेट मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और व्यक्तिगत संपर्क के जरिये मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश हो रही है।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, फीस, शोध के लिए फंड और एलुमनी से जुड़े मुद्दे प्रचार में जगह बना रहे हैं। इसके साथ ही मतदान की तैयारियों को लेकर पीयू प्रशासन तैयारियों में जुट गया है।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के विभिन्न जिलों में मतदान केंद्र, मतपत्रों की छपाई, मतदान कर्मियों की ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
जानें केंद्र सरकार बनाम छात्रों के बीच कैसे चला संघर्ष
अधिसूचना और बदलाव: 28 अक्टूबर 2025 को केंद्र सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी अधिनियम 1947 में संशोधन करते हुए सीनेट और सिंडिकेट की संरचना में बदलाव का फैसला किया। ग्रेजुएट कोंस्टीटूएंसी को समाप्त कर दिया गया और सीनेट की सदस्य संख्या को 91 से घटाकर 31 कर दिया था। केंद्र सरकार ने कहा कि सीनेट में अब निर्वाचित की जगह नॉमिनेटेड सदस्य होंगे।
छात्रों और राजनीतिक विरोध: इस निर्णय के खिलाफ 'पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा' के बैनर तले छात्रों, शिक्षकों और राजनीतिक दलों ने भारी प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों ने भी अपना समर्थन दिया है। इस प्रदर्शन ने आंदोलन का रूप लिया। आंदोलन तेज होने के बाद पीयू कैंपस में तनाव और सुरक्षा बढ़ा दी गई।
सरकार का यू-टर्न: भारी विरोध और बढ़ते दवाब के चलते केंद्र सरकार ने अपनी अधिसूचना वापस ले ली। 4 नवंबर 2025 को पुरानी अधिसूचना रद करने का आदेश आया। 7 नवंबर को अधिसूचना वापस ले ली। बाद में चांसलर (उपराष्ट्रपति) ने सीनेट चुनाव की प्रक्रिया व तारीखों को मंजूरी दी।
सीनेट और सिंडिकेट क्या है?
सीनेट और सिंडिकेट पंजाब विश्वविद्यालय में दोनों शासी निकाय है। इनको विश्वविद्यालय की नीतियां, बजट, नियुक्तियां और शिक्षा से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। सीनेट को सर्वोच्च निकाय कहा जाता है।
इसमें 91 निर्वाचित और कुछ नामांकित मिलाकर 100 से अधिक सदस्य हैं। इसमें पूर्व छात्र, प्रोफेसर, छात्र प्रतिनिधि, केंद्र-राज्य सरकार, कुलपति आदि शामिल होते हैं। सिंडिकेट को कार्यकारी समिति कहा जाता है। इसमें 15-20 सदस्य होते हैं। सीनेट फैसले लेती है और सिंडिकेट लागू करती है।
चुनावी मुद्दे : गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग
ज्वाॅइंट टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष रणबीर कुमार का कहना है कि नियमितीकरण पर जोरपंजाब के सहायता प्राप्त काॅलेजों में एडहाॅक शिक्षकों समेत सभी पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें पूर्ण रूप से लागू करवाना। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय में 20-20 वर्षों से एडहाॅक आधार पर सेवाएं दे रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा मेरी प्रमुखता है।
फीस वृद्धि पर रोक, हाॅस्टल और सुरक्षा पर जोर
सीनेट उम्मीदवार अजय सूद का कहना है उनका मकसर हर साल पंजाब विश्वविद्यालय में होने वाली फीस वृद्धि पर रोक लगाना है। विद्यार्थियों को बेहतर हाॅस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ कैंपस में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर है। छात्र हितों से जुड़े इन मुद्दों पर जोर रहेगा।
समय पर पदोन्नति और खाली पद भरने की मांग
सहायक प्रोफेसर संदीप सिंह हुंदल कहते हैं कि शिक्षकों की समय पर पदोन्नति, शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी शिकायत पोर्टल और सरकार की ओर से प्रतिबंधित खाली पदों को खोलने के लिए प्रयास करेंगे। शिक्षकों को किसी भी तरह के भेदभाव से बचाने और समान अवसर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
सहायता प्राप्त काॅलेजों में सातवां वेतन लागू करवाना
एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. इंदरपाल सिंह सिद्धू का कहना है कि पंजाब के सहायता प्राप्त काॅलेजों में एडहाॅक शिक्षकों समेत सभी पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें पूर्ण रूप से लागू करवाना है। इसके अलावा लंबे समय से एडहाॅक आधार पर सेवाएं दे रहे गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण पर जोर दिया जाएगा।
