जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल स्टेटस मिलने में किसी तरह की दिक्कत नहीं दिख रही। पीयू सुप्रीम बाडी सीनेट में 90 फीसद सीनेटर बीजेपी-आरएसएस समर्थित हैं। कुलपति प्रो. राजकुमार की भी केंद्र सरकार में मजबूत पकड़ है।

सूत्रों के अनुसार पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाए जाने को लेकर केंद्र सरकार में उच्च स्तर पर काफी समय से मंथन चल रहा है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार के लिए भी पीयू को सेंट्रल स्टेटस देने में दिक्कत नहीं आएगी। सीनेट और सिडिकेट के स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने के लिए रिफार्म कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट चांसलर आफिस को भी सौंपी जा चुकी है। सेंट्रल स्टेटस से मिलेंगे कई फायदे

पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेट मिलने से कई तरह के फायदे होंगे। पीयू को ग्रांट के लिए पंजाब सरकार की तरफ नहीं देखना होगा। बजट में भी कई गुणा इजाफा होगा। शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र 65 तक हो जाएगी। सभी कर्मचारियों के वेतनमान में भी इजाफा होगा। स्टूडेंट्स की बात करें तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई काफी सस्ती होगी। हास्टल फीस कम होगी और रिसर्च ग्रांट में भी कई गुणा इजाफा होगा। सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनने पर कुलपति का कार्यकाल भी पांच साल होगा। पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टेटस में किसी तरह के बदलाव के लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार फैसला लेने में सक्षम है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेट को लेकर 2016 में मैने हाई कोर्ट में पीआइएल डाली थी। हाई कोर्ट ने पीयू को सेंट्रल स्टेटस दिए जाने के आदेशों पर मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द कोई फैसला लेगी। पीयू से जुड़े सभी स्टेक होल्डर के लिए खुशी की बात है।

- प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, पूर्व कुलपति पंजाब यूनिवर्सिटी पीयू को सेंट्रल स्टेटस के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देना हाई कोर्ट बैंच का अच्छा फैसला है। पीयू के मौजूदा स्ट्रक्चर में बदलाव में कुछ समय लग सकता है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर फैसला ले सकती है। सेंट्रल स्टेटस से पीयू के टीचर्स और स्टूडेंट्स को काफी फायदा होगा।

- प्रो. आरसी सोबती, पूर्व कुलपति पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

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