डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़

पंजाब यूनिवर्सिटी के करीब दस विभागों की कैंटीन में फिलहाल सस्ती चाय,समोसा और लंच पहले की तरह मिलेगा। पीयू प्रशासन द्वारा विभागों के साइकिल शैड में चल रही कैंटीन को बंद कर प्राइवेट हाथों में देने का फैसला कैंपस में कड़े विरोध के बाद टाल दिया गया है। पीयू प्रशासन की ओर से विभागों की कैंटीन को प्राइवेट ब्रांड को देने के लिए गठित हाईपावर कमेटी की बुधवार को बैठक हुई। पूरे मामले में बैठक में मौजूद अधिकारियों के बीच जमकर बहस हुई। बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी के टीचर्स, नॉन टीचिग और दूसरे कर्मचारियों ने भी पीयू प्रशासन के कदम पर कई सवाल खड़े कर दिए।

दैनिक जागरण ने 28 जुलाई के अंक में पीयू में अब नहीं मिलेगी सस्ती चाय व समोसा ..शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर के बाद पूरे पीयू कैंपस में पीयू प्रशासन द्वारा स्टैकहोल्डर को जानकारी दिए बिना कैंटीन बंद करने के फैसले का कड़ा विरोध हुआ। आखिर में कमेटी ने प्रस्ताव को नए सिरे से तैयार करने पर सहमति दे दी ।

बुधवार दोपहर बाद पीयू कैंपस की सभी मौजूदा कैंटीन को बंद कर उनकी जगह नामी फूड ब्रांड को कैंपस में लाने पर बैठक हुई। प्रो.राजीव पुरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीएसडब्ल्यू , पीयू के एक्सईएन, पुटा प्रेसिडेंट, पुसा प्रेसिडेंट और कई विभागाध्यक्ष ने हिस्सा लिया। टीचिग और नॉन टीचिग प्रतिनिधियों ने पूरे मामले में अपना विरोध जताया । कमेटी के सामने सवाल रखा गया कि इस प्रस्ताव को लेकर ओपन सुझाव लिए जाने चाहिए थे। करीब ढ़ाई घंटे चली बैठक के बाद कैंटीन को बंद करने पर सहमति नहीं बनी।

सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में अब सभी विभागों के टीचर्स,स्टूडेंट्स और कर्मचारियों से फीडबैक लेकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर कमेटी में 30 से 40 वर्ष पुरानी कैंटीन को बंद करने के फैसले को सिडिकेट और सीनेट में अप्रूवल का प्रस्ताव भी रखा गया। पीयू प्रशासन द्वारा पुरानी कैंटीन को बंद करने की जानकारी मिलते ही कई छात्र संगठनों ने पीयू प्रशासन को विरोध की चेतावनी दे डाली। पीयू के सभी वर्गों को देखते हुए फिलहाल पीयू प्रशासन ने कैंटीन बंद करने का फैसला ठंडे बस्ते में डाल दिया है। एकेडमिक सत्र शुरू होने के बाद ही मामले में कोई कार्रवाई होगी ।

Edited By: Jagran