डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़

वर्ष 2000 से 2016 के बीच पंजाब यूनिवर्सिटी में करीब सौ करोड़ की लागत से हुए निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ। बिल्डिग बनने के कुछ वर्षो में ही दीवारों से टाइलें गिरने लगीं और छतों से पानी टपकने लगा। यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर ने सिडिकेट की मंजूरी के बाद हाईपावर कमेटी बनाई, जिसने पीयू प्रशासन को आठ दिसंबर 2018 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन ढ़ाई साल तक यह रिपोर्ट फाइलों में दबी रही। मामला चांसलर ऑफिस तक पहुंचने के बाद अब पीयू प्रशासन के उच्चाधिकारियों और इंजीनियरिग डिपार्टमेंट की नींद उड़ गई है।

जांच कमेटी ने 2000 के बाद बनी जिन बिल्डिग का ऑडिट किया था। यदि इस मामले में चांसलर ऑफिस के आदेश पर कार्रवाई हुई तो कई ठेकेदारों के अलावा पीयू के अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में पीयू प्रशासन के कई अधिकारियों पर तलवार लटक सकती है।

सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी के सदस्य और पूर्व सीनेटर प्रोफेसर रबींद्रनाथ शर्मा ने पूरी रिपोर्ट चांसलर ऑफिस को भेजी थी। इस पर अब चांसलर ऑफिस ने पीयू प्रशासन से जवाब तलब किया है। रिपोर्ट में हुई थी घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि

रिपोर्ट के मुताबिक 2000 से 2016 तक पीयू में बनी सभी बिल्डिग की ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें सिडिकेट की ओर से डीयूआइ की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने एक्सपर्ट के साथ मिलकर सभी बिल्डिग की जांच की। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि इन बिल्डिग में घटिया सामान लगाया गया है। पूर्व सीनेटर एचएस गौशल ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की थी। इन विभागों की बिल्डिग के निर्माण में हुई गड़बड़ी

- सेक्टर-25 साउथ कैंपस स्थित इंटरनेशनल हॉस्टल

- यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड मैनेजमेंट साइंसेस

- पीयू डेंटल कॉलेज, दो साइंस ब्लॉक, सेक्टर-14 स्थित राजीव गांधी कॉलेज भवन और गेस्ट हाउस मैं जांच कमेटी का मेंबर था। रिपोर्ट में साफ है कि निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। ढाई साल से मामले को लेकर कई बार कुलपति को कार्रवाई के लिए लिखा, लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। अब चांसलर ऑफिस से कार्रवाई की उम्मीद है।

- प्रोफेसर रबींद्रनाथ शर्मा, पूर्व सीनेट पंजाब यूनिवर्सिटी

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