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एक निवाला तक नहीं खा पा रही थी बच्ची, PU की तकनीक से जबड़े का पुनर्निर्माण; आठ साल बाद खुला मुंह

Published: Sat, 19 Sep 2026 04:44 PM (IST)

पंजाब यूनिवर्सिटी की 3D तकनीक ने बिहार की एक 16 वर्षीय बच्ची के जबड़े की जटिल सर्जरी में मदद की, ...और पढ़ें

पटना स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में बच्ची के जबड़े का पुनर्निर्माण किया गया।

पटना स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में बच्ची के जबड़े का पुनर्निर्माण किया गया।

HighLights

  1. पीयू की 3D तकनीक से बिहार में बच्ची के जबड़े का सफल पुनर्निर्माण।

  2. आठ साल बाद बच्ची अब मुंह खोलकर सामान्य रूप से खाना खा सकेगी।

  3. यह तकनीक देश के अन्य हिस्सों में भी मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में सहायक होगी।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की 3D तकनीक बिहार पहुंची और 16 वर्षीय बच्ची के जबड़े की जटिल सर्जरी में मददगार बनी। जो बच्ची एक निवाला तक नहीं खा पा रही थी और सिर्फ तरल पदार्थों के सहारे जिंदगी गुजार रही थी, उसके जबड़े का पुनर्निर्माण हुआ। अब बच्ची अपना मुंह खोल पा रही है और खाने में सक्षम हुई है।

पीयू के डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) और इंडस्ट्री 4.0 इनोवेशन सेंटर (आई4आइसी) ने 3D प्रिंटिंग और डिजिटल तकनीक के जरिये जटिल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में तकनीकी सहयोग दिया है।

पटना स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईजीआईएमएस) में 16 वर्षीय बच्ची के टेम्पोरोमैंडिबुलर ज्वाॅइंट (टीएमजे) का पूर्ण पुनर्निर्माण किया गया। डिजिटल रूप से डिजाइन किए गए और 3D प्रिंटेड मरीज-विशिष्ट इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया।

बिहार के बेगूसराय की रहने वाली बच्ची गंभीर टीएमजे एंकाइलोसिस से पीड़ित थी। मेडिकल टीम के अनुसार, करीब आठ वर्षों से वह अपना मुंह ठीक से नहीं खोल पा रही थी और इस दौरान तरल आहार पर निर्भर थी। सर्जरी से पहले उसका मुंह आधी उंगली से भी कम खुल रहा था। करीब तीन घंटे चली सर्जरी के बाद वह मुंह खोल पाने में सक्षम हुई।

विशिष्ट 3D प्रिंटेड इंप्लांट से टीएमजे पुनर्निर्माण

पीएम डेवाइन 3D प्रिंटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गुवाहाटी के मेडिकल हेड डॉ. कुमारी कविता ने बताया कि बिहार में डिजिटल रूप से डिजाइन किए गए और 3D प्रिंटेड मरीज-विशिष्ट इंप्लांट की मदद से कुल टीएमजे पुनर्निर्माण का यह पहला मामला है।

सर्जरी से पहले डिजिटल प्री-सर्जिकल प्लानिंग में इंडस्ट्री 4.0 तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस पहल का नेतृत्व पीयू के डिजाइन इनोवेशन सेंटर के प्रधान अन्वेषक प्रो. प्रशांत जिंदल ने किया। इसमें पीएम डेवाइन 3D प्रिंटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गुवाहाटी और इंडस्ट्री 4.0 इनोवेशन सेंटर की टीम ने सहयोग किया।

मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में तकनीकी सहयोग

डीआईसी पीयू वर्ष 2017 से मैक्सिलोफेशियल और क्रेनियोफेशियल सर्जनों को 3D प्रिंटिंग और डिजिटल तकनीक से सहयोग देता आ रहा है। अब आई4आईसी के साथ मिलकर इस तकनीकी विशेषज्ञता को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल और निदेशक डॉ. बिंदेय कुमार ने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 तकनीक साइबर और फिजिकल सिस्टम के बीच की दूरी कम करने के साथ जटिल सर्जरी में मददगार हो सकती है।

उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देश के अन्य टियर-2 व टियर-3 शहरों के अस्पतालों के साथ ऐसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।

छोटे शहरों में सुपर स्पेशियलिटी इलाज पहुंचाने पर जोर

अधिकारियों के अनुसार, ऐसी तकनीकी साझेदारियों से मरीजों को जटिल उपचार के लिए बड़े शहरों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

आईजीआईएमएस के मैक्सिलोफेशियल यूनिट प्रमुख डॉ. प्रियंकर सिंह ने डीआईसी, आई4आईसी और पीएम डेवाइन 3D प्रिंटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम का आभार जताते हुए भविष्य में भी ऐसी सर्जरी में सहयोग मांगा। डॉ. कविता ने बताया कि इस विषय पर जल्द ही राज्य स्तर पर विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों के साथ कार्यशाला आयोजित की जाएगी।