जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य सुधारने के लिए उन्हें रोजाना कम से कम 20.01 ग्राम प्रोटीन और 806.75 कैलरीज दी जानी चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके। सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशियन प्रोग्राम के तहत यह बेहद जरूरी है। यहां तक की ऐसे बच्चों को रोस्टेड चना, रोस्टेड मिलेट, रोस्टेड ब्लैक एंड व्हाइट दलिया, गुड़ और मुरमुरा मिक्सचर देना चाहिए। यह सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशियन प्रोग्राम एक से तीन साल तक के बच्चों के लिए है। इसके अलावा कड़ी-चावल, हलवा, आलू न्यूट्री, मूंगदाल, चावल, घीया, चना दाल आदि सप्लीमेंट्री न्यू्िट्रशियन तीन से छह साल तक के बच्चों को दिया जाना चाहिए। ताकि बच्चे कुपोषण का शिकार न हो। अमृत कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने वीरवार को धनास में कंस्ट्रक्शन साइट्स पर हेल्थ कैंप लगाया। जहां मजदूरों और उनके बच्चों की जांच की गई। इस दौरान हेल्थ कैंप में 56 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें तीन से छह साल की उम्र के दो बच्चे गंभीर कुपोषित पाए गए। उन्हें भारत सरकार की ओर से तय की गई सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशियन डाइट बताई गई। इन 56 लोगों में 44 बच्चे, तीन गर्भवती महिलाएं, पांच नर्सिग महिलाएं और दो बच्चियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। छह महीने में 254 कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लाया सुधार

छह महीने में अमृत कैंपेन के तहत स्वास्थ्य विभाग ने छह महीने में 254 कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। जबकि 72 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को नार्मल किया गया। शहर में इस समय 450 आंगनबाड़ी केंद्रों में 84 कुपोषित बच्चे इस समय स्वास्थ्य विभाग के पास रजिस्टर्ड हैं, जिनके स्वास्थ्य में सुधार को लेकर न्यूट्रिशियन प्रोग्राम के मानकों का लाभ पहुंचाया जा रहा, ताकि इन बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके।

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