चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। पंजाब कैबिनेट से आउट हुए नवजोत सिंह सिद्धू की कांग्रेस में अगली इनिंग क्‍या होगी और इसके बाद उनका अगला कदम क्‍या होगा इसको लेकर सस्‍पेंस की स्थिति बनी हुई है। गुरु की चुप्‍पी से उनके सियासी भविष्‍य को लेरकर रहस्‍य गहराता जा रहा है। वैसे कांग्रेस में उनकी पारी और अगली भूमिका अब पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर निर्भर है। माना जा रहा है कि प्रियंका ही पार्टी में उनके भविष्‍य और अगली इनिंग के बारे में फैसला करेंगी। ऐसे में इस पूर्व क्रिकेटर को पैवेलियन में बैठ कर मैच देखने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

राजनीतिक जानकाराें का कहना है कि सिद्धू कांग्रेस में बने रहेंगे, इसका फैसला अब प्रियंका वाड्रा की पार्टी में भूमिका पर भी निर्भर करेगा। राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद कांग्रेस का एक वर्ग प्रियंका में नया अध्यक्ष ढूंढ रहा है। ऐसे में सिद्धू को कांग्रेस में बरकरार रखने के लिए प्रियंका अहम फैसला ले सकती हैं। उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) में अहम ओहदा मिल सकता है।

सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री कराने में भी रही थी प्रियंका की अहम भूमिका

अहम बात यह है कि सिद्धू का इस्तीफा भी उसी समय हुआ है, जब प्रियंका कांग्रेस में अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं। सिद्धू को कांग्रेस में लाने में प्रियंका की अहम भूमिका थी। उन्होंने सिद्धू का कैबिनेट ओहदा बरकरार रखने और कैप्‍अन अमरिंदर सिंह व उनका विवाद खत्‍म कराने की काफी कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। पूरे घटनाक्रम में सिद्धू के पास 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। अगर प्रियंका के हाथ में कांग्र्रेस की कमान आती है, तो सिद्धू को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

सिद्धू के कैबिनेट से आउट होने से पंजाब कांग्रेस के एक बड़े तबके ने राहत की सांस ली है। उनकी कांग्रेस में एंट्री के समय भी कई वरिष्ठ नेता खुश नहीं थे। भारतीय जनता पार्टी की पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धू का बड़बोलापन कांग्रस नेताओं के एक वर्ग को कभी रास  नहीं आया।

कांग्रेस में एंट्री के साथ ही सिद्धू ने जो तेवर दिखाए थे, उससे लगातार यह संकेत मिल रहे थे कि यहां भी उनका विवाद हो सकता है। सिद्धू ने अपने आक्रामक तेवर से कई फ्रंट खोल लिए थे। अकाली दल को घेरते-घेरते सिद्धू ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी सीधी टक्कर ले ली।

बार-बार गलतियों से बढ़ी मुश्किल

ढाई साल में तीन ऐसे मौके आए जब सिद्धू की वजह से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान जाकर वहां के सेना प्रमुख का जफ्फी डालना, अमरिंदर सिंह को अपना कैप्टन मानने से इन्कार करना और बठिंडा में पार्टी के विरोध में टिप्पणी करना जैसे मामलों से उनकी काफी किरकिरी हुई। सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद इस बात की संभावना कम ही है कि कांग्रेस सिद्धू को पंजाब में कोई बड़ा ओहदा दे। ऐसा होने पर उनका विरोध और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास सिद्धू को एआइसीसी में ले जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। 

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चंडीगढ़ में सरकारी कोठी छोड़ पत्‍नी व बेटी संग अमृतसर पहुंचे सिद्धू

अमृतसर। नवजोत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी छोडऩे के बाद रविवार शाम को यहां होली सिटी स्थित अपने निवास पर पहुंचे। सिक्योरिटी के साथ ही वह कोठी में दाखिल हुए और काफिले के अंदर जाते ही गेट बंद कर दिए गए। उनके साथ पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू और बेटी राबिया भी थीं। सिद्धू परिवार ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। देर शाम तक कोई भी उनसे मिलने कोठी पर नहीं पहुंचा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सिद्धू ने अपना इस्तीफा 15 जुलाई को भेजा था। शनिवार को उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया।

इसी दिन उन्होंने सरकारी आवास छोड़ दिया था। कयास लगाया जा रहा था कि वह चंडीगढ़ से दिल्ली जाएंगे, लेकिन वह रविवार को अमृतसर के लिए कूच कर गए और शाम साढ़े छह बजे के करीब अमृतसर पहुंचे। सिद्धू परिवार के घर के अंदर दाखिल होने के बाद गाडिय़ों से सामान निकाला गया और सुरक्षाकर्मियों को वापस जाने के निर्देश दे दिए गए। उनके जाते ही कोठी के तीनों गेट अंदर से बंद कर लिए गए। मीडिया ने बातचीत के लिए गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से संपर्क किया, पर उन्होंने मना कर दिया।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha