जेएनएन, चंडीगढ़। पटियाला सलवार, जिसे पटियाला रियासत से लिया गया। इसकी अपनी कहानी है, जिसकी शुरुआत रियासत से होती है। ये रियासत ही है, जो धरोहर को बचाए हुए हैं। बेशक आज ट्रेंड या फैशन बना हो मगर उस समय से आज के समय तक लाने में इनका अपना योगदान है। पटियाला की रानी विनीता सिंह ने कुछ इन्हीं शब्दों में शाही परिवार और उनके द्वारा ट्रेडिशन की शुरुआत और उनके रखरखाव पर बात की। रानी विनीता सेक्टर-17 स्थित एक होटल में आयोजित रॉयल एग्जिबिशन के दौरान पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेने पहुंचीं। पैनल डिस्कशन में उनके साथ पटियाला के राजा रंधीर सिंह, नाभा की कुंवर रानी प्रीती सिंह, कुठलेड़ की रानी ओमकरेशवरी नालागढ़ की रानी पूनम भी शामिल हुए। राजा रंधीर सिंह ने कहा कि हर राज्य की विरासत का एक घराना बना, जिसे शाही परिवारों ने बचा कर रखा है। इसमें पटियाला और शाम चौरासी जैसे घराने भी प्रसिद्ध हैं। ये कल्चर केवल यहीं तक नहीं रहा, बल्कि अफगानिस्तान तक भी गया।

हर रॉयल फैमिली का पगड़ी पहनने का अपना अंदाज होता था। इससे पहचान होती थी कि वह किस क्षेत्र से है। शाही अंदाज ने सभ्यता को भी स्थापित किया नाभा की कुंवररानी प्रीती सिंह ने कहा कि उनके ससुर के पिताजी के पिताजी प्रताप सिंह ने राज्य में कई विकास किए। इसमें भारत में हॉरलिक्स लाने जैसे उपक्रम भी शामिल हैं। साथ ही उन्होंने अपने दो महल केवल इसलिए बेच दिए थे, क्योंकि वह वहां एक स्कूल और कॉलेज शुरू करना चाहते थे।

वहीं नालागढ़ की रानी पूनम ने कहा कि रियासत ने अपने ज्यादातर कला से जुड़ी चीजों को म्यूजियम को दिया है। ताकि सभी लोग इसे देख सकें। सेशन का अंत करते हुए राजा रंधीर सिंह ने कहा कि शाही परिवारों की रियासत को आगे ले जाने में महिलाओं का भी योगदान रहा है। शाही अंदाज देखने पहुंचे बदनौर आप बेरी से हैं, वहां तो मैंने वाइल्ड लाइफ पर काफी तस्वीरें की हैं। अच्छी जगह है। अकसर जाता हूं वहां। पंजाब के गवर्नर और यूटी के प्रशासक वीपी सिहं बदनौर ने जैसे ही बेरी का स्टॉल देखा तो कुछ इन्हीं शब्दों में उन्होंने इस अंदाज में उन्होंने बातचीत की।

गवर्नर बदनौर एग्जिबिशन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। वह खुद एक राजसी परिवार से हैं। उन्होंने हर स्टॉल पर जाकर उनकी खासियत के बारे में जाना। खासकर राजस्थान की विभिन्न चीजों को देखा। कल्चर, ट्रेडिशन और कई चीजों पर बात की। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा को राजसी परिवारों ने आज तक संभाले रखा है, ये एक अच्छा प्रयास है।

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