चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। पंजाब में बोर्ड आैर निगमों का चेयरमैन बनने की बाट जोह रहे विधायकों व पार्टी नेताओं के सब्र का बांध टूटने की कगार पर पहुंच गया है। सरकार भी इस बात को महसूस करने लगी है। एक तरफ जहां सरकार चेयरमैन लगाने की तैयारी में जुट गई है वहीं, इसकी भनक लगते ही लॉबिंग भी तेज हो गई है।

बोर्ड व कारपोरेशन का चेयरमैन बनने के लिए लॉबिंग शुरू

पंजाब में कांग्रेस सरकार बने हुए 15 माह हो चुके हैं। पहले साल सरकार ने लोकसभा उपचुनाव और नगर निगम चुनावों व उसके बाद कैबिनेट विस्तार का हवाला देकर बोर्ड व निगमों के चेयरमैन नहीं नियुक्‍त किए। कैबिनेट विस्तार हुए दो माह हो चुका है। इसके बाद कैबिनेट में जगह नहीं बना पाने वाले विधायकों में खासा रोष भी दिखाई दिया। यह मामला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी तक भी पहुंचा लेकिन सरकार ने 'तेल देखो, तेल की धार देखो' की नीति को अपनाया।

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अब चेयरमैन बनने के चाहवानों का सब्र का बांध भी टूटने लगा है। सरकार यह भी मान रही है कि मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए अब वह ज्यादा देर नहीं कर सकती है। यही कारण है कि सरकार में अब बोर्ड व कारपोरेशन का चेयरमैन बनाने की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

जानकारी के अनुसार, अभी इस बात पर भी विचार चल रहा है कि पहले चेयरमैनों के नामों की घोषणा की जाए या कांग्रेस के संगठन की। राज्य में कांग्रेस संगठन का पुनर्गठन भी लंबित है। पार्टी के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि विधायकों को जिला प्रधान नहीं बनाया जाएगा। 

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कैबिनेट में जगह नहीं बना पाने वाले कई विधायक पहले ही नाराज चल रहे हैं। ऐसे में कुछ विधायकों को सरकार बोर्ड और निगमों में एडजस्ट करने की तैयारी में है। इसलिए इस बात की संभावना ज्यादा है कि पहले बोर्ड व निगम के चेयरमैनों की घोषणा कर दी जाए। चेयरमैन बनने के चाहवानों ने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक की लॉबिंग शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि कुछ दिनों में ही सरकार चेयरमैनों के नामों की घोषणा कर देगी।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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