जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीति पार्टियों ने अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। चंडीगढ़ के सभी पार्टी नेता अब चुनावी तैयारी के मूड़ में हैं। हर नेता अब लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने लगे हैं। हाल ही में नगर निगम द्वारा 1400 से अधिक गारबेज कोलेक्टर को हटाने का फरमान जारी कर दिया। इसके बाद तो शहर की राजनीति से जुड़े लोग इस मुद्दे में वोट बैंक को तलाशने लगे। एक ही मंच पर काग्रेस के नेता पवन बंसल तो बीजेपी नेता हरमोहन धवन और संजय टंडन तक गारबेज कोलेक्टर के लिए सड़कों पर खड़े मिले। आखिर आगामी चुनाव को देखते हुए बीजेपी भी इस बड़े वोट बैंक को खोना नहीं चाहती थी। नगर निगम मेयर और बीजेपी नेता देवेश मोदगिल तक जो पहले गारबेज कोलेक्टर को नगर निगम की पॉलिसी के तहत भर्ती करने के पक्ष में खड़े दिख रहे थे, उन्होंने भी इस मामले में जमकर राजनीति की और वोट बैंक को साधने के लिए निगम कमेटी की बैठक के फैसले को वापिस लेकर वाहवाही लूटने की कोशिश की। उधर गारबेज कोलेक्टर बेशक अब फिर से काम पर लौट आए हैं। लेकिन सभी राजनीतिक पार्टियों में इस फैसले को बदलवाने को लेकर क्त्रेडिट वार शुरु हो चुका है।

कमीशन गए तो बदल दिया फैसला

नगर निगम में काफी समय बाद किसी कड़े फैसले लेने वाला कमिश्नर आया। केके यादव ने निगम का आर्थिक हालात को ठीक करने के लिए काफी ग्राउंड लेवल पर काम किया। नगर निगम की बैठक को भी उन्होंने बहुत बेहतर तरीके से चलाया। गारबेज कोलेक्टर मामले में केके यादव ने काफी अच्छा स्टैंड लिया। उन्होंने निगम मशीनरी को भी काफी अच्छे से हैंडल किया। लेकिन जैसे ही वह छुंट्टी पर गए राजनीति के चलते गारबेज कोलेक्टर मामला में यूटर्न ले लिया गया।

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