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    सड़क पर पुलिस को ओवरटेक के लिए साइड नहीं देना पड़ा महंगा! कार चालक को NDPS में फसाया; अब कोर्ट ने लगाई फटकार

    Updated: Mon, 16 Sep 2024 04:13 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को ड्रग्स मामले में झूठे आरोप में फंसाने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा एनडीपीएस अधिनियम का दुरुपयोग कानून प्रवर्तन में जनता के विश्वास को कमजोर करता है और ड्रग से संबंधित अपराधों से निपटने के वास्तविक प्रयासों से ध्यान भटकाता है।

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    पुलिस द्वारा एनडीपीएस अधिनियम का दुरुपयोग किया गया। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

    दयानंद शर्मा , चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को ड्रग्स मामले में झूठे आरोप में फंसाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा एनडीपीएस अधिनियम का दुरुपयोग कानून प्रवर्तन में जनता के विश्वास को कमजोर करता है और ड्रग से संबंधित अपराधों से निपटने के वास्तविक प्रयासों से ध्यान भटकाता है।

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    इस मामले में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता पर पुलिस अधिकारियों द्वारा एनडीपीएस अधिनियम के तहत झूठी एफआईआर दर्ज की गई थी क्योंकि उसने सड़क पर गाड़ी चलाते समय पुलिस को ओवरटेक करने के लिए साइड नहीं दी थी।

    जस्टिस कीर्ति सिंह ने मामले की जांच करने और याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले संबंधित दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई का विवरण , स्टेटस रिपोर्ट हलफनामे के रूप में दाखिल करने के लिए डीजीपी को आदेश दिया है।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में पुलिस की मनमानी की घटनाएं हुई हैं, जहां निर्दोष नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।

    यह कार्रवाइयां अक्सर सत्ता के दुरुपयोग और जवाबदेही की कमी से उपजी हैं, मामूली मुठभेड़ों की नियमित जांच को कानून का पालन करने वाले व्यक्तियों के दर्दनाक अनुभवों में बदल देती हैं, निर्दोष लोग खुद को कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ पाते हैं, उन पर बेबुनियाद आरोप लगते हैं जो उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं और उनके जीवन को बाधित करते हैं।

    कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम का इस तरह से दुरुपयोग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सुधारों और सख्त निगरानी की नियमित आवश्यकता को उजागर करता है। कोर्ट ने यह टिप्पणियां लवप्रीत सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसे पंजाब के कपूरथला जिले में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 22 के तहत दर्ज एक प्राथमिकी में गिरफ्तार किया गया था।

    एफआईआर के अनुसार, सिंह ने कथित तौर पर पुलिस को देखकर तेजी से गाड़ी चलाना शुरू कर दिया और उसे नशीले कैप्सूल के साथ पकड़ा गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 24 जून को धान के खेत का निरीक्षण करने के बाद याचिकाकर्ता अपनी कार से लौट रहा था। चूंकि सड़क संकरी थी और पुलिस की गाड़ी उसकी कार के पीछे थी, इसलिए जब वह चौड़ी सड़क पर पहुंचा, तो याचिकाकर्ता ने उसे पास देने के लिए गाड़ी को किनारे कर दिया।

    यह कहा गया कि पुलिस अधिकारी नाराज हो गए क्योंकि याचिकाकर्ता ने उन्हें पहले जाने का रास्ता नहीं दिया, और याचिकाकर्ता का मोबाइल फोन और वाहन अपने कब्जे में ले लिया, जिसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया। सरकार द्वारा पेश हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, याचिकाकर्ता ने दो महीने और 15 दिनों की वास्तविक हिरासत का सामना किया है और वह किसी अन्य मामले में शामिल नहीं है।

    रिकॉर्ड पर रखी गई एफएसएल रिपोर्ट से पता चला कि भेजे गए नमूने पैरासिटामोल के थे। सभी तथ्यों को देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट, जिसमें यह पाया गया है कि बरामद कैप्सूल में केवल साल्ट एसिटामिनोफेन (पेरासिटामोल) है, इसलिए याचिकाकर्ता नियमित जमानत का हकदार है।

    कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 20 सितम्बर तक स्थगित करते हुए कपूरथला एसएसपी को अगली सुनवाई पर कोर्ट में उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया।