चंडीगढ़, जेएनएन। ऐसे काफी लोग हैं जिन्हें साइंटिफिक तौर पर कोरोना नहीं हुआ। यह इसलिए कि इनको लक्षण नहीं आए या घर पर ही इलाज कर लिया। लेकिन हो सकता है कि संक्रमण की चपेट में यह आए हों। इसी तरह से बच्चों की इम्युनिटी स्ट्रांग होती है। उन्हें भी हो सकता है कोरोना संक्रमण ने अपनी चपेट में लिया हो। लेकिन असर नहीं दिखने से पता नहीं चला।

अब सही मायनों में ऐसे कितने बच्चों को कोरोना हुआ या होने के बाद ठीक हुए और इम्युनिटी डेवलप हो गई। इन सबका पता लगाने के लिए अब सीरो सर्वे हो रहा है। 18 वर्ष से कम आयु वर्ग का सीरो सर्वे की चंडीगढ़ के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्टडी होगी। इस आयु वर्ग में अभी तक किसी को कोरोना वैक्सीन भी नहीं लगी है। ऐसे में सीरो सर्वे का परिणाम इस आयु वर्ग को भविष्य में वैक्सीनेट करने के लिए भी अहम होगा।

पंजाब राजभवन में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में आयोजित कोविड वॉर रूम मीटिंग के दौरान सीरो सर्वे पर यह चर्चा हुई। इस दौरान पीजीआइ के एक्सपर्ट ने बताया कि बच्चों पर ऐसा सर्वे पूरे देश में पहली बार पीजीआइ चंडीगढ़ कर रहा है। यह सर्वे देश के दूसरे संस्थानों के काम भी आएगा। सर्वे रिजल्ट से इस आयु वर्ग को भविष्य में वैक्सीनेशन की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। जिस तरह से तीसरी लहर में संभावना यही जताई जा रही है कि वैक्सीन नहीं लगे इस आयु वर्ग को संक्रमण चपेट में ले सकता है। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट को रणनीति बनाने में यह मदद करेगा। बता दें कि चंडीगढ़ में पीजीआइ 18 वर्ष से कम और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर-32 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग का सीरो सर्वे कर रहा है। सीरो सर्वे का पूरा खर्च प्रशासन उठा रहा है।

रिकवरी रेट बढ़कर 97.7 फीसद हुआ

डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डा. अमनदीप कंग ने बताया कि अब चंडीगढ़ में रिकवरी रेट 97.7 फीसद है, जबकि मृत्युदर 1.3 फीसद है। वहीं अब संक्रमित मामले डबल होने का समय बढ़कर 724 दिन हो गया है। अब शहर में हालात बेहतर हो रहे हैं।

Edited By: Ankesh Thakur