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नाक के जरिये ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, 2 वर्ष के बच्चे को मिली नई जिंदगी, चंडीगढ़ PGI ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

By Sohan Lal Edited By: Sohan Lal
Published: Thu, 15 Jan 2026 12:00 PM (GMT+05:30)

PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने दो साल के बच्चे में दुनिया का सबसे बड़ा मेनिंजियोमा ब्रेन ट्यूमर एंडोस्कोपी से सफलतापूर्वक ...और पढ़ें

ओपन सर्जरी किए बगैर नाक के रास्ते एंडोस्कोपी के जरिये निकाला मेनिंजियोमा ट्यूमर।

ओपन सर्जरी किए बगैर नाक के रास्ते एंडोस्कोपी के जरिये निकाला मेनिंजियोमा ट्यूमर।

HighLights

  1. इससे पहले 2020 में स्पेन में 12 वर्षीय बच्ची की सर्जरी हुई थी।

  2. दो साल के बच्चे का यह पहला मामला।

  3. बिना ओपन सर्जरी के नाक के रास्ते सफल ऑपरेशन।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए दो साल के बच्चे में दुनिया का सबसे बड़ा मेनिंजियोमा ट्यूमर केवल एंडोस्कोपी तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल दिया है। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर पहली बार दर्ज की गई है।

हरियाणा के सोनीपत निवासी दो वर्षीय बच्चे को बाईं आंख के बाहर निकलने, आंखों की गतिविधि रुकने, नाक से गांठ दिखाई देने, खर्राटे आने और आंख से अत्यधिक पानी बहने की शिकायत के बाद पीजीआई लाया गया था।

जांच में सीटी स्कैन और एमआरआई से खुलासा हुआ कि बच्चे के नाक, साइनस, आंख की कक्षा और मस्तिष्क तक फैला 7 सेंटीमीटर का विशाल स्कल बेस ब्रेन ट्यूमर मौजूद है। बायोप्सी में यह ट्यूमर मेनिंजियोमा पाया गया, जो बच्चों में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

चिकित्सकों के अनुसार, अब तक इस तरह का केवल एक मामला वर्ष 2020 में स्पेन में सामने आया था, वह भी 12 वर्षीय बच्ची में, जिसमें ओपन सर्जरी करनी पड़ी थी। पीजीआई के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. धनदापानी और ईएनटी विभाग के प्रो. अनुराग के नेतृत्व में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने इस अत्यंत जटिल सर्जरी को बिना ओपन सर्जरी से नाक के रास्ते एंडोस्कोपी के जरिये किया।

उच्च जोखिम के बावजूद सफल सर्जरी

डॉक्टरों ने बताया कि स्कल बेस मेनिंजियोमा की सर्जरी वयस्कों में भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। दो वर्षीय बच्चे में इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, हाइपोथर्मिया, तरल संतुलन बिगड़ने और जान को खतरा होने की आशंका थी। इसे देखते हुए न्यूरोसर्जरी, ईएनटी, न्यूरोएनेस्थीसिया और नर्सिंग विभाग की विशेष टीम बनाई गई।

आधुनिक तकनीक से संभव हुई सर्जरी

ट्यूमर नाक के रास्ते नीचे तक और साइड में मैक्सिलरी साइनस तथा आंख की कक्षा तक फैला हुआ था। इसे निकालने के लिए एक्सपैंडेड एंडोनेजल एंडोस्कोपी, नेविगेशन सिस्टम, 45 डिग्री एंगल्ड एंडोस्कोप, कोब्लेटर और विशेष घुमावदार उपकरणों का उपयोग किया गया।

ट्यूमर अत्यधिक रक्तसंचारित और हड्डियों में फैला हुआ था, इसके बावजूद डॉक्टरों ने पूरी तरह एंडोस्कोपी से ही ट्यूमर को निकालने में सफलता हासिल की, जिससे ओपन न्यूरोसर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।

नौ घंटे चली सर्जरी, एमआरआई में पूरी तरह साफ

करीब नौ घंटे तक चली सर्जरी के बाद खोपड़ी के आधार में बने बड़े छेद को कई परतों में सुरक्षित रूप से रिपेयर किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। पोस्ट-ऑपरेटिव एमआरआई में ट्यूमर पूरी तरह निकलने की पुष्टि हुई है।