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PGI में कैंटीन का टेंडर रद, डीजल भट्ठी पर बनाते थे खाना; मरीजों से वसूलते से अधिक दाम 

Published: Sun, 18 Oct 2026 05:23 PM (IST)

पीजीआई चंडीगढ़ की न्यू ओपीडी कैंटीन का लाइसेंस मरीजों से ओवरचार्जिंग और डीजल भट्ठी के प्रयोग के कारण रद कर ...और पढ़ें

पीजीआई की कैंटीन में डीजल भट्टी पर बनाया जा रहा था खाना।

पीजीआई की कैंटीन में डीजल भट्टी पर बनाया जा रहा था खाना।

HighLights

  1.  31 दिसंबर तक परिसर खाली करने का आदेश।

  2. निरीक्षण के दौरान मिली थीं अनियमितताएं।

  3. , पहले भी लगाया गया था 35,400 जुर्माना।

मोहित पांडेय, चंडीगढ़। मरीजों और तीमारदारों से ओवरचार्जिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के मामले में पीजीआई की न्यू ओपीडी ब्लाॅक स्थित कैंटीन का लाइसेंस टर्मिनेट कर दिया गया है।

कैंटीन में डीजल भट्ठी पर खाना बनाने और मरीजों से अधिक दाम वसूलने पर यह कार्रवाई की गई है। संस्थान ने कैंटीन संचालक को 31 दिसंबर तर कैंटिन खाली करने के आदेश दिया है।

पीजीआई के एस्टेट ब्रांच के अनुसार, कैंटीन का ठेका बलजीत सिंह को 19 अगस्त 2025 को तीन साल के लिए दिया गया था। इसके लिए 20.20 लाख रुपये से अधिक मासिक लाइसेंस शुल्क और जीएसटी तय किया गया था।

शिकायतों के आधार पर निरीक्षण समिति ने 2 दिसंबर 2025 और 18 मई 2026 को कैंटीन का निरीक्षण किया। दोनों बार अनियमितताएं मिलने पर संचालक से जवाब मांगा गया। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर 11,800 और 23,600 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

बता दे कि पीजीआई ने 5 सितंबर 2026 को कैंटीन संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संचालक ने 11 सितंबर को जवाब देते हुए आरोपों को निराधार और कार्रवाई को अनुचित बताया था।

हालांकि, संस्थान ने निरीक्षण रिपोर्ट, शिकायतों, पत्राचार और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा के बाद जवाब को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद कैंटीन का लाइसेंस टर्मिनेट करने का आदेश जारी कर दिया गया।

डीजल भट्ठी के इस्तेमाल से सुरक्षा को खतरा

पीजीआई के अग्निशमन अधिकारी ने 23 मई 2026 की रिपोर्ट में कैंटीन परिसर के भीतर डीजल से चलने वाली भट्ठी के इस्तेमाल की जानकारी दी थी। रिपोर्ट में इसे बिल्डिंग और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए जोखिम बताया गया।

लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, रसोई में एलपीजी की आपूर्ति निर्धारित पाइपलाइन से होनी चाहिए। इसके साथ ही व्यावसायिक गैस उपकरणों और पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य था।