जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के कैचमेंट पर आए फैसले का लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को कांसल गांव में पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा तीनों गांवों के लोग बड़ी संख्या में जुटे। पंजाब के पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने कहा कि इतने लोगों को उजाड़ा तो ये कहां जाएंगे। जिन गांवों की जमीन पर सुखना लेक बनी, अब उन्हें ही उजाड़ा जा रहा है। अगर उस वक्त लोगों को पता होता कि कल उनके ही घर टूटने का कारण सुखना लेक बनेगी तो वह इसे बनने ही नहीं देते। रणजीत सिंह गिल ने हाई कोर्ट के इस फैसले को ही नकारते हुए इसे तुगलकी फरमान बताया। उन्होंने कहा कि इतने घर नहीं तोड़े जा सकते। इस लड़ाई को वह सब मिलकर लड़ेंगे। आगे की लड़ाई के लिए एक ज्वाइंट कमेटी का गठन होगा। जिसमें सभी गांवों से प्रतिनिधि को रखा जाएगा। सरकार अपनी तरफ से रास्ता निकालने में लगी है। लेकिन वह सरकार से अलग वकील कर इसको चुनौती देंगे। सुप्रीम कोर्ट जाने पर कर रहे विचार

गिल ने कहा कि इस काम में पैसे की जरूरत भी होगी सभी के सहयोग की जरूरत रहेगी। हाई कोर्ट में रिव्यू के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जाने पर भी विचार किया जा रहा है। विधायक कंवर सिंह संधू और पूर्व विधायक जगमोहन सिंह कंग ने भी इसे लोगों पर हो रही ज्यादती बताया। मीटिग में कांसल, खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला, नयागांव और सकेतड़ी के निवासी मौजूद रहे। पंजाब ने बनाई है छह सदस्यीय कमेटी

पंजाब सरकार भी फैसला आने के बाद से विचलित है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने इस फैसले को रिव्यू करने के लिए सांसद मनीष तिवारी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। चीफ प्रिसिपल सेक्रेटरी भी इस कमेटी में शामिल हैं। सभी इस फैसले की बारीकियों को समझ रहे हैं। उसके बाद कोई फैसला लेंगे। हाई कोर्ट ने सुखना कैचमेंट एरिया से 2004 के बाद हुए निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। इसमें कैंबवाला, कांसल, खुड्डा अलीशेर, नयागांव और सकेतड़ी गांव में बने मकान और दूसरे निर्माण शामिल हैं।

Posted By: Jagran

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