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कल्पना चावला के कॉलेज में 824 स्टूडेंट्स को डिग्री, कोई स्पाइना बिफिडा से लड़ा तो कोई देश के लिए खेलते हुए भी पढ़ा

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:02 PM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में 56वें दीक्षांत समारोह में 824 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज में डिग्री हासिल करने के बाद खुशी जताते स्टूडेंट्स।

पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज में डिग्री हासिल करने के बाद खुशी जताते स्टूडेंट्स।

HighLights

  1. पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज का 56वां दीक्षा समारोह।

  2. 824 को यूजी से पीएचडी तक की उपाधियां प्रदान।

  3. 737 बीटेक, 69 एमटेक और 18 को पीएचडी की उपाधि।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर, अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन करने वाली कल्पना चावला और एयरोस्पेस क्षेत्र में योगदान देने वाले सचिन धवन चंडीगढ़ सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज (पेक) की प्रतिभाएं हैं।

इसी कॉलेज से अब ऐसी प्रतिभाएं भी निकलीं है जिन्होंने स्पाइना बिफिडा को मात देकर और देश के लिए खेलते हुए भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। इन लोगों ने देश और दुनिया को नई राह दिखाई है। पेक ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सपनों को साकार करने के साथ ही दुनिया को नई दिशा दी है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पेक में आयोजित 56वें दीक्षा समारोह में यह बात कही।

समारोह में कुल 824 उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 737 बीटेक, 69 एमटेक और 18 पीएचडी की उपाधियां शामिल हैं। समारोह में 675 विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने डिग्रियां प्राप्त कीं। शेष 149 विद्यार्थियों को अनुपस्थिति में उपाधियां प्रदान की गईं। 

इस दौरान वाइस चांसलर प्रो. भोला राम गुर्जर और पेक फैकल्टी मौजूद रही। प्रशासक ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल करने वालों को सम्मानित किया।

उन्होंने पेक की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए कहा कि संस्थान ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि पेक की शैक्षणिक और तकनीकी जरूरतों को आधुनिक समय के अनुरूप पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

डीआरडीओ में नौकरी के साथ पूरी की पीएचडी

पीएचडी की उपाधि हासिल करने वाले डाॅ. तिरुपति चंद शर्मा वर्ष 2008 से डीआरडीओ चंडीगढ़ में वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और वेस्ट वाॅटर ट्रीटमेंट तथा इलेक्ट्रिकल मैटेरियल से जुड़े विषय पर शोध किया। शर्मा ने कहा कि काम के साथ इस मुकाम तक पहुंचने में पेक की गाइड डाॅ. वसुंधरा का सहयोग रहा।

स्पाइना बिफिडा को मात देकर बीटेक, अब स्टार्टअप का सपना

ओडिशा के सौरभ ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है। बचपन से स्पाइना बिफिडा से प्रभावित होने के कारण वह अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके। उन्होंने उड़ीसा से आकर एयरोस्पेस में डिग्री पूरी की।

अब उनका सपना अपना स्टार्टअप शुरू करने का है। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत रहे हैं। मां के निधन के बाद उनके पिता परिवार के साथ रह रहे हैं।

आईस हाॅकी में देश का नेतृत्व, अब करियर में भी दोहरी पारी

भारतीय टीम की कप्तानी कर चुकीं नानकी ने आईस हाॅकी के साथ कंप्यूटर साइंस में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। नानकी ने बताया कि खेल के साथ कंप्यूटर की दुनिया को समझना भी उनका शौक है। अब वह खेल और कंप्यूटर साइंस, दोनों को करियर के रूप में आगे बढ़ाना चाहती हैं।

हादसे में पिता को खोया, अब मां और बहन का सहारा बनेंगे विश्वजीत

राजस्थान के विश्वजीत ने सिविल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल के साथ बीटेक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले इंटर्नशिप के दौरान सड़क हादसे में उनके पिता का निधन हो गया था।

इसके बाद उनकी मां करीब तीन महीने तक पैरालाइज रहीं। अब उनकी मां की स्थिति में सुधार है। विश्वजीत का सपना सफल होकर मां और बहन का सहारा बनने और पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का है।